गोरखपुर। वाणिज्य कर चुकता न करने पर विभाग अब सख्त कार्रवाई करेगा। विभाग ने टैक्स चोरी रोकने के लिए दो राज्य स्तरीय टास्क फोर्स गठित की है। ये टीमें जिलों के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर सीधे छापामारी करेंगी। स्थानीय स्तर पर गोपनीय सूचनाएं इकट्ठी की जाने लगी है। वाणिज्य कर मुख्यालय में टैक्स संबंधी ब्योरा तैयार करने के लिए डाटा एनालिसिस सेल का गठन किया गया है। इसमें प्रदेश के संदिग्ध व्यापारियों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है। जिलों से खाद्य तेल, आयरन स्टील, पान मसाला, वुड एंड वुडन प्रोडक्ट का कारोबार करने वालों का डाटा मांगा गया है। इसके अलावा व्यापारी किससे माल खरीदते हैं और किसे बेचते हैं, उनसे जुड़े ट्रांसपोर्टर, बैंक खाते आदि की भी जानकारी मांगी जा रही है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार डाटा एनालिसिस सेल का प्रभारी एडिशनल कमिश्नर प्रदीप कुमार को बनाया गया है। वहीं दो अलग-अलग टास्कफोर्स की जिम्मेदारी एडिशनल कमिश्नर सीबी सिंह और प्रभारी एडिशनल कमिश्नर एके उपाध्याय को दी गई है। वाणिज्य कर विभाग के विशेष अनुसंधान शाखा के ज्वाइंट कमिश्नर एससी शर्मा ने बताया कि टैक्स चोरी पर अंकुश के लिए विभाग ने विशेष रणनीति तैयार की है।
गोरखपुर में हैं 61 हजार से ज्यादा व्यापारी
जीएसटी लागू होने के बाद गोरखपुर मंडल में व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। वैट प्रणाली के दौरान मंडल में 41531 व्यापारी पंजीकृत थे, वही जीएसटी के बाद यह संख्या 61161 हो गई है। इससे राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष मई तक विभाग को करीब 15 करोड़ रुपये ज्यादा राजस्व प्राप्त हुआ है।
‘छापेमारी के नाम पर उत्पीड़न न हो’
चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय सिंघानिया ने कहा कि टैक्स चोरी के नाम पर व्यापारियों का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। सभी व्यापारी निर्धारित टैक्स जमा करने के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन अक्सर कागजों की जांच के नाम पर उत्पीड़न किया जाता है। उन्होंने व्यापारियों से भी नियमानुसार टैक्स जमा करने का आह्वान किया।