गोरखपुर।
ऑक्सीजन की कमी से बीआरडी में हुई मौतों के मामले में लिक्विड ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म पुष्पा सेल्स पर पहले भी मनमानी के आरोप लगे हैं। प्राचार्य की ओर से उन्हें सख्त चेतावनी जारी करते हुए अधूरे काम पूरा न कराने की स्थिति में किसी अनहोनी की सूरत में फर्म को जिम्मेदार ठहराने की बात कही थी। इसके अलावा जनवरी 2015 में फर्म के खिलाफ एक अन्य शिकायत के क्रम में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण ने प्राचार्य को जांच कराकर कार्रवाई करने का आदेश दिया था।
दरअसल, एनआरएचएम के तहत 100 बेड इंसेफेलाइटिस वार्ड में लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट से पाइप लाइन के जरिए ऑक्सीजन सप्लाई के लिए 2014 में टेंडर मिला। इसके तहत उसे ऑक्सीजन पाइप लाइन का कंप्रेशर, एअर वैक्युम, इमरजेंसी रेग्युलेटर समेत ऑक्सीजन प्लांट का निर्माण कराना था। निर्माण कार्य तीन महीने में कराना था लेकिन फर्म ने सुस्ती बरती। इसके चलते समय से 100 बेड वार्ड में लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू नहीं हो पा रही थी। इस पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. केपी कुशवाहा ने फर्म को चेतावनी पत्र जारी किया था। इसमें कार्य जल्द पूर्ण न कराने की सूरत में भविष्य में किसी तरह की विषम स्थिति बनने पर फर्म को सीधा जिम्मेदार मानने की बात कही थी। फर्म की ओर से पाइप लाइन का 90 प्रतिशत काम कराने के बाद प्लांट का निर्माण न करा पाने को लेकर भ्रष्टाचार मुक्त भारत संस्था की ओर से महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण को शिकायत भेजी गई थी। इसमें कार्य सही से न कराने और लेटलतीफी का आरोप था। इन आरोपों की जांच कराकर कार्रवाई करने के लिए 14 जनवरी 2015 को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण ने प्राचार्य को आदेश दिया था।
जून 2016 में भी ठप की थी सप्लाई
पुष्पा सेल्स ने अगस्त 17 में ही नहीं बल्कि जून 2016 में भी मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी। तब भी इसे लेकर हंगामा हुआ था। मरीजों की जान से जुड़े इस संवेदनशील विषय पर पुष्पा सेल्स का रवैया शुरू से असंवेदनशील रहा। अगस्त में पुष्पा सेल्स ने बकाया के चलते सप्लाई रोकी तो कई मरीजों की जान भी चली गई।