आयुर्वेद संभाषा परिषद के संरक्षक डॉ. वीके सिंह।
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एनएमसी के खिलाफ आईएमए की एक दिवसीय हड़ताल का आयुर्वेद चिकित्सकों ने विरोध किया है। आयुर्वेद डॉक्टरों के संगठन आयुर्वेद संभाषा परिषद ने आगे इस तरह की हड़ताल की सूरत में अतिरिक्त काम करने की घोषणा भी की है।
परिषद के संरक्षक डॉ. विनय कुमार सिंह ने कहा कि कैबिनेट ने निर्णय ले लिया। लोकसभा में बिल पास हो गया ऐसे में आईएमए का विरोध ठीक नहीं है। आईएमए अगर आगे इस तरह का प्रदर्शन करेगा तो हम सभी आयुर्वेद चिकित्सक अतिरिक्त काम कर मरीजों की सेवा करेंगे। सभी आयुर्वेद चिकित्सक सरकार के इस बिल का समर्थन करते हैं। छह महीने के प्रशिक्षण के बाद सरकार की ओर से हमें मॉडर्न मेडिसिन लिखने का हक दिए जाने का लाभ सुदूर इलाकों में रहने वाले मरीजों को मिलेगा। सरकार की यह पहल सराहनीय है।
...तो वो क्यों लिखते हैं आयुर्वेदिक दवाएं
आयुर्वेद संभाषा परिषद के पदाधिकारी डॉ. प्रकाश त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि एलोपैथ चिकित्सक अन्य विधा के चिकित्सकों के एलोपैथिक दवाएं लिखने का विरोध कर रहे हैं, लेकिन खुद दूसरी विधाओं की दवाएं लिखने से गुरेज नहीं। जब हम एलोपैथिक दवाएं नहीं लिख सकते तो वो क्यों आयुर्वेदिक दवाएं लिख सकते हैं। एमटू 10, लिव 52 आदि कई ऐसी दवाएं हैं, जो एलोपैथ चिकित्सक नियमित लिखते रहते हैं।
होम्योपैथी पूर्ण, हमें ब्रिज कोर्स की जरूरत नहीं
होम्योपैथी चिकित्सकों के संगठन की आयुर्वेद चिकित्सकों से अलग राय है। प्रांतीय होम्योपैथिक चिकित्सा सेवा संघ उत्तर प्रदेश के प्रदेश महासचिव डॉ. प्रभाकर राय ने कहा कि होम्योपैथी पूर्ण है। हमें ब्रिज कोर्स की जरूरत नहीं। हमें एलोपैथ चिकित्सकों की तरह काम करने के बराबर मौके मिलें, तो हम अपनी पैथी से ही मरीजों की बेहतर सेवा कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से आयुर्वेद और होम्यापैथ पद्धति खतरे में आ जाएगी। जब इन विधाओं के चिकित्सक एलोपैथ की प्रैक्टिस करने लगेंगे, तो इन पद्धतियों का वजूद स्वयं ही खत्म हो जाएगा। हम साढ़े पांच साल की पढ़ाई से जितनी बेहतर सेवा कर सकते हैं, उतनी छह माह के शॉर्ट प्रशिक्षण से नहीं। जरूरत पड़ी तो संगठन शासन स्तर पर एनएमसी का विरोध करेगा।