हड़ताल के दौरान आईएमए के डॉक्टरों ने सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में सभा की।
- फोटो : Amar Ujala
मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की जगह केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नेशनल मेडिकल कौंसिल (एनएमसी) बिल को काला कानून बताते हुए आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के सदस्य मंगलवार को सुबह छह से शाम छह बजे तक हड़ताल पर रहे। राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर काला दिवस मनाते हुए सदस्य चिकित्सकों ने निजी अस्पताल एवं क्लिनिक बंद रखे। चिकित्सकों के आंदोलन के चलते बाह्य रोग विभाग समेत इनडोर सेवाएं भी बाधित रहीं। आईएमए के स्थानीय पदाधिकारियों ने हड़ताल के संबंध में सीतापुर आई हॉस्पिटल में सभा की। इसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई संस्था एमसीआई की जगह मनोनीत संस्था एनएमसी के गठन को साजिश बताया गया।
आईएमए जोन चार के सचिव डॉ. आरपी त्रिपाठी ने कहा कि एनएमसी के जरिए डॉक्टरों का प्रतिनिधित्व समाप्त करने की साजिश हो रही है। डॉ. एससी कौशिक ने कहा कि एनएमसी बिल से मेडिकल कॉलेजों की गुणवत्ता घटेगी और चिकित्सा शिक्षा महंगी हो जाएगी। अध्यक्ष डॉ. जेपी जायसवाल ने कहा कि अन्य चिकित्सा पद्धतियों के चिकित्सकों को अल्पकालीन प्रशिक्षण देकर उन्हें एलोपैथिक डॉक्टरों के समकक्ष तैनात करना देश के मरीजों के साथ विश्वासघात होगा। स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य डॉ. डीके सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों का शैक्षणिक स्तर सुधारने की जगह सरकार मेडिकल छात्रों की एमबीबीएस कोर्स के बाद पुन: परीक्षा लेकर कोचिंग, कॉलेजों एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना चाहती है।
सचिव डॉ. आरपी शुक्ल ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाया। कहा कि दूसरे देशों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों के लिए आवश्यक पात्रता परीक्षा समाप्त करने के पीछे क्या उद्देश्य है? सभा में एक स्वर से मांग उठी कि सरकार एनएमसी बिल को पूर्णतया वापस ले या पुनर्विचार के लिए इसे स्टैंडिंग कमेटी को भेजे। डॉक्टरों ने ऐसा न होने की सूरत में आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। सभा को डॉ. महेंद्र अग्रवाल, डॉ. वीरेंद्र गुप्ता, डॉ. आरएन सिंह, डॉ. दिलीप मणि त्रिपाठी, डॉ. आरके पांडेय ने भी संबोधित किया। इस दौरान करीब 200 सदस्य डॉक्टर मौजूद रहे।
मरीजों ने झेली सांसत
आईएमए की हड़ताल से मरीजों को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। दूरदराज से पहुंचे मरीजों को निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों पर निराशा हाथ लगी। तमाम मरीज बिना इलाज के ही वापस चले गए। वहीं बड़ी संख्या में मरीजों ने इंतजार करना बेहतर समझा। कई मरीजों ने रैन बसेरे में वक्त काटा। कुलपति आवास के पास बने रैन बसेरे में मोतिहारी से मनोज को लेकर आए विश्वनाथ प्रसाद और राजदेव प्रसाद ने कहा कि इतनी दूर से आने के बाद इलाज न करा पाना अखरने वाला है। हड़ताल खत्म होने के बाद डॉक्टर को दिखाकर ही वापस जाएंगे। आजमगढ़ से मरीज पंकज को दिखाने आए गिरीश सिंह भी शहर के एक बड़े मनोचिकित्सक की क्लीनिक से निराश लौटकर इसी रैन बसेरे में शरण लिए हुए थे। उन्होंने कहा कि मरीज को दिखाना जरूरी है। हड़ताल के चलते मजबूरी में इंतजार करना पड़ रहा है।