बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरती की मौत के पीछे जिस बेहोशी की दवा के ओवरडोज को कारण बताया जा रहा है, उसका सच सामने आना जरूरी है। डॉ. आरती के शरीर में इस दवा की मौजूदगी भी अभी तक साबित नहीं हो सकी है। बिसरा जांच में ही इसका सच पता चल सकेगा। दूसरी ओर फोरेंसिक टीम को हॉस्टल में डॉ. आरती को आवंटित 35 नंबर कमरे में बेड के पास से खाली सीरिंज तो मिली, लेकिन इंजेक्शन का वायल नहीं मिला।
शनिवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट ने यह भी आशंका जताई कि इंजेक्शन को सीरिंज में भरने के बाद उसे खिड़की से झाड़ियों में फेंक दिया गया हो। हालांकि, इस तर्क को फोरेंसिक टीम स्थापित नहीं कर पाई। टीम खाली वायल ढूंढने में नाकामयाब रही। सबसे बड़ा सवाल यह कि ऑपरेशन के वक्त मरीजों को बेहोश करने के लिए जिस दवा का इस्तेमाल बड़े सर्जन भी नहीं जानते, उसके बारे में गायनी की स्टूडेंट को कैसे पता चला। बेहोशी की इस दवा के इस्तेमाल के लिए बड़े-बड़े सर्जन भी विशेषज्ञ को बुलाते हैं। बीआरडी के एक विशेषज्ञ चिकित्सक ने नाम न छापने के अनुरोध पर बताया कि इस दवा की डोज सिर्फ एक्सपर्ट को ही मालूम होती है। ऐसे में मरने लायक इसकी डोज तय करना स्टूडेंट के लिए मुश्किल है।
बिसरा की जांच से पता चलेगा सच
डॉ. आरती की मौत को आत्महत्या बताते हुए इसके पीछे बेहोशी की दवा के इस्तेमाल का दावा महज एक सीरिंज की बरामदगी पर टिका हुआ है। पोस्टमार्टम में मौत के कारण का पता न चलने और घर वालों के कहने पर अब बिसरा को जांच के लिए लखनऊ भेजा गया है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकता है।
सीरिंज और बिसरा की जांच जरूरी
जानकारों की मानें तो अगर सीरिंज और बिसरा की जांच में अंतर पाया गया तो आत्महत्या की थ्योरी फुस्स हो जाएगी। अगर दोनों जगहों पर एक ही दवा मिली तो सीरिंज पर उंगलियों के निशान का मिलान डॉ. आरती के फिंगरप्रिंट से करना होगा। इन कड़ियों के जरा भी बेतरतीब होना आत्महत्या बताई जा रही इस घटना को हत्या में तब्दील कर देगा। फिलहाल पुलिस प्राथमिक जांच में हर पहलू पर गौर कर रही है।
विभागीय रिपोर्टिंग की व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे सवाल
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की सीनियर रेजिडेंट डॉ. आरती की मौत की मिस्ट्री के बीच यहां के कायदों को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। हर स्टूडेंट की रिपोर्टिंग के लिए आवासीय मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था की गई है। इसके तहत स्टूडेंट की 24 घंटे की गतिविधि पर सहज ही नजर रखी जा सकती है, लेकिन सूत्रों की मानें तो कॉलेज में मौखिक तौर पर ही इस व्यवस्था को चलाया जा रहा था। इसके लिए तय रजिस्टर में जिम्मेदार रिपोर्ट दर्ज नहीं कर रहे थे।
इस व्यवस्था के तहत जूनियर रेजिडेंट के ऊपर सीनियर को तैनात किया जाता है। सीनियर के ऊपर कंसल्टेंट होता है। कंसल्टेंट एचओडी को रिपोर्ट करता है। सवाल यह कि अगर आरती को पेट में दर्द था तो कायदे के मुताबिक उसे कंसल्टेंट को इसकी सूचना देनी चाहिए थी। इसका जिक्र रजिस्टर में होना चाहिए था। कंसल्टेंट ने उसकी बीमारी की सूचना एचओडी को दी थी या नहीं। यह सब उस रजिस्टर से पता चलेगा, जिसका प्रावधान आवासीय मेडिकल कॉलेज में रहने वाले रेजिडेंट के लिए होता है। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर लोग इस रजिस्टर को लेकर गंभीर नहीं हैं। अब डॉ. आरती की मौत के बाद इसे लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। इस संबंध में एचओडी डॉ. रीना श्रीवास्तव से बात हुई तो उन्होंने पहले कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। फिर रिकॉर्ड के सवाल पर उन्होंने सारे दस्तावेज दुरुस्त होने की बात कही।
...तो जूनियर को मानना था आदेश
आवासीय मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था के तहत जूनियर रेजिडेंट की रिपोर्टिंग सीनियर के पास होती है। वह अपनी बात सीधे एचओडी से न कहकर सीनियर से कहता है। सीनियर इसकी जानकारी कंसल्टेंट को देता है और फिर कंसल्टेंट इसकी सूचना एचओडी तक पहुंचाता है। इस व्यवस्था के मुताबिक जूनियर को सीनियर का आदेश मानना होता है। ऐसे में डॉ. आरती के कहने पर जूनियर को उन्हें इंट्राकैथ इंजेक्शन लगाना ही था।
बीआरडी के हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इंदिरा हॉस्टल में रहने वाली गायनी विभाग की पीजी थर्ड ईयर स्टूडेंट डॉ. आरती की संदिग्ध हाल में मौत ने छात्रावासों की सुरक्षा पर भी बहस छेड़ दी है। बेहद सुरक्षित माने जाने वाले गर्ल्स हॉस्टल ही नहीं बल्कि बीआरडी के सभी छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था की खामियां सामने आने लगी हैं। बीआरडी के किसी भी हॉस्टल में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं हैं। हॉस्टल के गेट पर गार्ड मौजूद रहता है। उसके बाद बाबू और वार्डन। इनकी निगाह से बचकर हॉस्टल में घुसना कठिन है, लेकिन इसके बाद भी कैंपस में चोरी की घटनाएं होती रहती हैं। चोरी से नाराज जूनियर डॉक्टर पिछले दिनों सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर चुके हैं। इसके बाद भी कैंपस में सिर्फ कुछ जगहों पर ही सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। किसी भी हॉस्टल में कैमरे नहीं हैं। रविवार को कैंपस में यह भी चर्चा रही कि अगर हॉस्टल में कैमरे लगे होते तो डॉ. आरती की मौत की गुत्थी उलझी न होती।