कुशीनगर। अहिरौलीदान व बाघाचौर गांव के सामने बीते 24 दिन से कटान कर रही गंडक नदी के तेवर तो कुछ नरम पड़े हैं, लेकिन सहमे लोगों का पलायन अब भी जारी है। लोग अपने सामान तो पहले ही हटा चुके हैं, अब मकान तोड़कर मलबा हटाने में लगे हैं।
गंडक नदी अगस्त के तीसरे सप्ताह से ही अहिरौलीदान गांव के सामने कटान कर रही है। इस गांव के चित्तू टोला, कंचनटोला, डीह टोला व कचहरी टोला के अलावा सितंबर महीने में बाघाचौर गांव के नोनिया पट्टी टोला के सामने भी कटान तेज हो गया। भयभीत लोग अपना सामान हटाकर दूसरी सुरक्षित जगह पर चले गए। एक पखवारे से यहां के लोग अपने पक्के व कच्चे मकानों को तोड़कर ईंट व अन्य सामान भी ले जा रहे हैं। नदी हर दिन गांव के हिस्से को काटते हुए बंधे की तरफ बढ़ रही है। अहिरौलीदान से सटे बिहार प्रांत के गाइड बांध के पास भी कटान होने से कई गांव प्रभावित हैं। बिहार प्रांत का सिंचाई विभाग भी कटाने रोकने के लिए प्रयासरत है, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है। कई जगह नदी एपी तटबंध के समानांतर हो गई है। इसके चलते तटबंध पर भी खतरा बना हुआ है। अहिरौलीदान व बाघाचौर गांव के लोगों के अनुुसार सोमवार को कटान की गति धीमी रही, लेकिन नदी के रुख को देखते हुए यहां अब रुकने को कोई तैयार नहीं है। लोगों का कहना है कि जलस्तर में थोड़ा सा भी बदलाव होते ही कटान की गति पुन: तेज हो जाएगी। यहां के निवासी हरिश्चंद्र, शिवरतन, नगीना, योगेंद्र, रामचंद्र, रामाज्ञा आदि लोग सामान समेत गांव छोड़कर जा चुके हैं। जिला पंचायत सदस्य अरविंद सिंह पटेल, ग्राम प्रधान हीरालाल यादव, दीनानाथ सिंह, सुजीत यादव, अरविंद सिंह आदि का कहना है कि बचाव कार्य देर से शुरू होने की वजह से ही इन गांवों का वजूद खतरे में पड़ा है।