बंदियों को तनाव मुक्त करने के लिए मंडलीय कारागार में आर्ट ऑफ लिविंग का छह दिवसीय शिविर शुरू हुआ। मंगलवार को 25 बंदियों ने ध्यान और भजन का आनंद उठाया। प्राणायाम, सत्संग और ध्यान की क्लास में बंदी शामिल होंगे। एक घंटे तक चलने वाली क्लास में बंदियों को हिंसा से दूर रहने और अच्छा जीवन जीने का तरीका बताया जाएगा।
जेल में बंदियों को डिप्रेशन से बचाने के लिए वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. रामधनी प्रसाद की ओर से पहल की गई है। आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर संजय पांडेय और जेल प्रशासन के संयुक्त प्रयास से छह दिवसीय शिविर की शुरुआत हुई। सुबह साढ़े सात बजे से प्राणायाम, सत्संग और ध्यान की क्लास चली। सजायाफ्ता बंदियों को अधिक संख्या में शामिल करने का प्रयास किया गया।
डॉ. रामधनी ने बताया कि इससे मानसिक रूप से बंदीे मजबूत होंगे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों को सुधारना है। इस तरह के और भी कार्यक्रम जेल में कराए जाएंगे। शिविर में महिला बंदी भी शामिल हो रही हैं।