गोरखपुर। रेलवे मैदान में आयोजित ‘अनुग्रह उत्सव’ में हिस्सा लेने पहुंचे आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर मंगलवार को अचानक गोरखनाथ मंदिर पहुंच गए। वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ 45 मिनट तक बैठक की, फिर गुरु गोरक्षनाथ और महंत अवेद्यनाथ का दर्शन करके रेलवे मैदान में पहुंचे। मुख्यमंत्री से मिलकर निकले श्रीश्री ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा। सुलह-समझौते की कोशिश को पूरे देश से समर्थन मिला है। सभी पक्षों से बातचीत का क्रम बरकरार रखते हुए प्रयास आगे भी जारी रहेगा। हमारी कोशिश बेकार नहीं जाएगी।
मंगलवार शाम श्रीश्री गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। गोरक्ष पीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीश्री का स्वागत किया। दोनों ने एक दूसरे को फूलमाला पहनाई और प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इसके बाद मुख्यमंत्री और श्रीश्री की बैठक हुई और यह 45 मिनट तक चलती रही। कयास लगाए जा रहे हैं कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण पर चर्चा हुई है। हालांकि पूरे तथ्य निकलकर सामने नहीं आ सके। श्रीश्री ने इतना जरूर कहा कि अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा।
श्रीश्री के मंदिर आगमन पर सीएम ने बदला कार्यक्रम
मंगलवार को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में तीन कार्यकर्ता सम्मेलनों में हिस्सा लेने के बाद मुख्यमंत्री को दोपहर बाद लखनऊ जाना था लेकिन आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के गोरखनाथ मंदिर पहुंचने की सूचना के साथ ही उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल दिया। अब वह गोरखनाथ मंदिर में ही रात्रि विश्राम करेंगे। बुधवार को गोरखपुर से सीधे नई दिल्ली रवाना होंगे।
आर्ट ऑफ लिविंग भी कर सकता है यूपी में निवेश
सीएम से मुलाकात के दौरान श्रीश्री ने गंगा और यमुना नदी की सफाई पर भी चर्चा की। यूपी के विकास, बेहतर कानून व्यवस्था और अच्छे निवेश पर भी चर्चा हुई। सब कुछ ठीक रहा तो आर्ट ऑफ लिविंग की तरफ से भी यूपी में निवेश किया जा सकता है। पतंजलि की तरह आर्ट ऑफ लिविंग के भी तमाम प्रोडक्ट बाजार में उपलब्ध हैं।
होली से पहले अध्यात्म के रंग में सराबोर हुए शहरवासी
गोरखपुर। दी आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर की अनुग्रह उत्सव यात्रा मंगलवार को शहर पहुंची। श्रीश्री सैय्यद मोदी रेलवे स्टेडियम में शहरवासियों से रूबरू हुए तो माहौल में दिव्यता घुल गई। होली से पहले शहरवासी अध्यात्म के रंग से सराबोर हो गए।
स्टेडियम पहुंचने के बाद श्रीश्री ने सबसे पहले अनुयायियों को आशीर्वाद दिया। फिर ध्यान से लोगों को चेतना की ओर खींच ले गए। बोले, हमारे अंदर, बाहर ओम है। हमारे प्राण के भीतर छिपी चेतना को जागृत करने वाला ओम ही है। ओम आदि है और अनादि भी है। चेहरे पर मुस्कान और शरीर को ढीला छोड़कर जब लोगों ने श्रीश्री के मार्गदर्शन में ओम का अभ्यास किया तो ध्यान स्थल का जर्रा-जर्रा ओंकारमय हो उठा। श्रीश्री ने कहा कि इस जन्म से पहले हम ओंकार में थे। इस जन्म के बाद हम इसी में विलीन होने वाले हैं। शरीर पृथ्वी तत्व से बना है, इसी में मिल जाना है। ओम के अभ्यास के दौरान उन्होंने पंचतत्वों का अहसास कराया। कहा कि महसूस करें जैसे जल में मछली वैसे हवा में हम। ईश्वर की गोद में बैठे होने की सोच दिलाकर श्रीश्री लोगों को भीतर-बाहर ईश्वर को महसूस करा गए। 20 मिनट का ध्यान सत्र लोगों को आनंद सागर में खींच ले गया।
ध्यान के बाद उन्होंने अनुयायियों से कहा कि हाल ही में वैज्ञानिक शोध में आया की भारत में गुरुत्वाकर्षण कम है। जहां गुरुत्वाकर्षण कम होता है, वहां लोगों में तनाव कम देखने को मिलता है। इसलिए इसको पृथ्वी की नाभि बताया गया है और यूपी तो अवतार भूमि है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इसे और भी बेहतर बनाएं।
उन्होंने जैविक खेती को बढ़ावा देने और दहेजप्रथा के खात्मे के लिए अनुयायियों से संकल्पित होने का आह्वान किया। कहा कि बिना बोतल और नॉनवेज के दिल्ली में शादी नहीं होती। यूपी में ऐसा नहीं है, लेकिन दिल्ली दूर नहीं। इस बुराई को यहां आने से रोकना होगा। एक-एक व्यक्ति को आगे आकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुंदर और स्वस्थ समाज का निर्माण करना होगा। उन्होंने लोगों को साधना और ध्यान की ताकत समझाई। कहा कि साधना से मन प्रफुल्लित होता है, उत्साह भर जाता है। पर इस उत्साह का क्या करोगे? इसे समाज के लिए लगाएं। अमरीका का जिक्र करते हुए एक वर्ष के दौरान स्कूलों में हुई गोलबारी की घटनाएं गिनाईं। कहा कि जैसा पागलपन वहां है, यहां न आए। योग और ध्यान से हमारे भीतर जो आनंद खिलता है वो कहीं भी नहीं मिलता।
प्रवीण और अंबरीश के भजनों पर झूमे लोग
दी आर्ट ऑफ लिविंग के गायक प्रवीण मेहरा और अंबरीश ने अपने भजनों से लोगों को भक्तिभाव से भर दिया। हजारों की भीड़ भजनों के बीच तालियां बजाते झूमती नजर आई।
श्रीश्री ज्ञान मंदिर के बच्चों ने मोहा
श्रीश्री ज्ञान मंदिर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय, ओरेवा टाड़ के बच्चों ने अनुग्रह उत्सव में विभिन्न प्रस्तुतियां देकर लोगों का मन मोह लिया। शुरुआत गणपति वंदना पर नृत्य पेश करके की। फिर त्रिमूर्ति नाट्यम की प्रस्तुति दी। पिंकी, सीमा, कुसुम, संजीरा, प्रियंका, सविता आदि की प्रतिभा को लोगों ने खूब सराहा।
बंद आंखों से पढ़कर सुनाया
श्रीश्री यूनिवर्सिटी की छात्रा मान्या ने इंट्यूशन प्रोसेस का प्रदर्शन किया तो लोग आश्चर्य से भर गए। आंखों पर पट्टी बंधी होने के बाद भी छात्रा ने जब संचालिका अर्चना सतीश की डायरी के विभिन्न पन्नों पर लिखे वाक्य पढ़ डाले, तो सभी चमत्कृत भाव से उसे निहारते रह गए।
श्रीश्री के उठते ही नाच उठे लोग
श्रीश्री कार्यक्रम के समापन के दौरान दोबारा रैंप पर चलकर अनुयायियों के बीच गए तो हजारों की भीड़ अपने गुरु को करीब पाकर नाच उठी। आनंद में डूबे लोग जहां खड़े थे वहीं नृत्य करने लगे।
ये दिए मंत्र
परिवार में विरोधाभास हो तो संतुलन बनाने के लिए किसी एक का पक्ष न लें, युक्ति का इस्तेमाल करें।
युक्ति, भक्ति, शक्ति और मुक्ति का दिया मंत्र
देश-काल से परे होती है चेतना, महापुरुष किसी क्षेत्र विशेष के नहीं
प्रार्थना दिलाती है पीड़ा से छुटकारा
तुम किसी के हो ये समझ लो तो हीनभावना मिट जाएगी
जो कर्ता है वही भोक्ता भी है
जीवन विधि और स्वतंत्रता का सम्मिलन है
मूर्ति के आगे ध्यान लगाने से उस व्यक्तित्व की तरह का प्रभाव मन में भरता है, चेतना की अवस्था में यह प्रभाव स्थायी हो जाता है
भ्रष्टाचार और अपराध आदि से निराश होकर बैठने नहीं, हम भारत का भविष्य बनाने के लिए जग में आए हैं