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जिले में दौड़ रही हैं 117 अनफिट स्कूली बसें

Wed, 10 Feb 2016 01:39 AM IST
गोरखप़ुर। अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। जिले में दौड़ रहीं 117 स्कूली बसें अनफिट हैं, बावजूद इसके स्कूल प्रबंधन बच्चों की जान जोखिम में डालकर इन्हें चलवा रहा है। इसका खुलासा हुआ है डीएम ओएन सिंह के एआरटीओ प्रवर्तन से अनफिट स्कूली बसों की सूची मांगने पर। इससे परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। एआरटीओ प्रवर्तन ने आनन-फानन में स्कूल संचालकों को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है। परिवहन विभाग बुधवार से अभियान भी चलाएगा।
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जिले में वर्तमान समय में 830 बसें स्कूलों के नाम पर दर्ज हैं। सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों की बैठक के दौरान डीएम ओएन सिंह ने एआरटीओ प्रवर्तन से स्कूली बसों की ‘सेहत’ जांचने का सबूत मांगा था। उन्होंने कहा था कि हर हाल में दो से तीन दिन के भीतर उन्हें स्कूली वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट की रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। बता दें कि स्कूली वाहनों से हुई पिछली दुर्घटनाओं की जांच में पाया गया था कि संबंधित वाहनों की फिटनेस काफी पहले ही खत्म हो गई थी।

डीएम के निर्देश के बाद मंगलवार को जब एआरटीओ प्रवर्तन ने स्कूल बसों की सूची और अनफिट बसों का रिकार्ड निकाला तो विभाग में हड़कंप मच गया। 117 स्कूली बसें ऐसी मिलीं जिनका फिटनेस फेल हो चुका है, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने इन बसों का फिटनेस टेस्ट नहीं कराया है। एआरटीओ प्रवर्तन/प्रशासन ने बाबू को निर्देश दिया कि जिन स्कूलों की बसें फिटनेस में फेल हैं, उन्हें तत्काल नोटिस भेजा जाए।
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इनसेट
बाबू की तय हुई थी जिम्मेदारी
स्कूली बसों से हादसे रोकने के लिए शासन ने आदेश दिया था कि जिन स्कूली बसों का फिटनेस खत्म हो रहा हो उसकी जानकारी परिवहन विभाग की तरफ से एक सप्ताह पहले स्कूल प्रबंधन को दे दी जाए। इसके लिए संबंधित बाबू को स्कूल में फोन करके और नोटिस भेजकर जानकारी देने को कहा गया था, लेकिन 117 स्कूली बसों की फिटनेस मामले में बाबू की तरफ से स्कूल प्रबंधन को अवगत नहीं कराया गया।

तीन महीने से नहीं हुई चेकिंग
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार तीन महीने से स्कूली बसों को चेक ही नहीं किया गया। अधिकारी इसके पीछे ग्राम पंचायत चुनाव को कारण बता रहे हैं। हालांकि पूर्व में कमिश्नर और जिलाधिकारी के साथ हुई बैठक में स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि वे बस की फिटनेस फेल होने पर तत्काल उसे चेक कराएं। अगर स्कूल प्रबंधन ऐसा नहीं करता है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी

इनसेट
2013 में बनी थी नई गाइड लाइन
वाहन शैक्षिक संस्था के नाम से हो।
निजी आपरेटर भी पंजीकरण कराने के बाद स्कूल बस का इस्तेमाल कर सकते हैं।
आगे और पीछे बड़े अक्षराें में स्कूल बस लिखा होना चाहिए।
बस पर स्कूल का नाम तथा टेलीफोन नंबर दर्ज हो।
स्कूल बस में किराए पर सवारी नहीं ढोई जाएगी।
बस की अधिकतम आयु 15 वर्ष होगी।
प्रत्येक बस में बच्चों की सूची, नाम, पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप और रूट चार्ट उपलब्ध रहे।
बस में चालक के अलावा अनुभवी पुरुष व महिला सहायक तैनात रहें।
चालक व सहायक को ड्यूटी के समय निर्धारित ड्रेस पहननी होगी।
बस में फर्स्ट एड बॉक्स हो। अधिकतम स्पीड 40 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा न हो।
बस में प्रेशर हार्न या टोनल साउंड सिस्टम प्रतिबंधित रहेगा।
चालक के पास व्यावसायिक वाहन चलाने का पांच वर्ष पुराना लाइसेंस होना चाहिए।
बसों में आरामदेह सीट तथा आर्मरेस्ट होना चाहिए।
सेफ्टी बेल्ट, आर्मरेस्ट व बॉडी के बीच में साधारण हुक द्वारा लगाई जा सकती हो।
सीट के नीचे स्कूल बैग, बच्चों की किताबें रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।

स्कूली बसों से हुईं दुर्घटनाएं
पांच जनवरी को गोला में स्कूली बस और रोडवेज बस में आमने-सामने हुई टक्कर में एक स्कूली बच्चे की मौत हो गई थी। इस हादसे में 17 लोग घायल हुए थे।
रामगढ़ताल पुलिस चौकी के पास 2012 में एचपी स्कूल सहारा इस्टेट की स्कूल बस अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। जांच में बस का फिटनेस फेल मिला था। स्कूल के खिलाफ नोटिस भेजकर परिवहन विभाग ने जुर्माना जमा कराया था। पुलिस ने बस के चालक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था।

जिन 117 बसों का फिटनेस फेल हुआ है वे दस से बीस दिनों के अंदर की ही हैं। सभी को नोटिस भेजा जा रहा है। बुधवार से स्कूल बसों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
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