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पिता को जमीन दिलाने में फंस गए लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष

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बस्ती। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष अनियमित तरीके से अपने पिता के नाम जमीन दर्ज कराने में फंस गए हैं। तहसीलदार की रिपोर्ट पर एसडीएम न्यायालय ने वाद दाखिल हुआ है। कोर्ट ने प्रधान और पिता नगई को कोर्ट में हाजिर होने के लिए सम्मान जारी किया। दोनों को चार अक्टूबर 2017 में न्यायालय में उपस्थित होना है। इस मामले को अमर उजाला निरंतर सामने ला रहा है।
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वर्ष 2014 में एसडीएम कोर्ट के आदेश से लेखपाल रामसुमेर के पिता बहादुरपुर ब्लॉक के ग्राम मीतनजोत गांव निवासी नगई को आवास के लिए 63 एअर यानी लगभग पांच बिस्वा जमीन दी गई। जबकि नियमानुसार लेखपाल के परिवार के किसी भी सदस्य के नाम न तो सरकारी जमीन का पट्टा हो सकता है और न ही उसके नाम राशन कार्ड बन सकता है। मगर इन दोनों मामलों में नियमों की अनदेखी कर लेखपाल ने पहले पिता के नाम जमीन आंवटित कराई, उसके बाद माता और पत्नी के नाम बीपीएल कार्ड बनवा दिया। नियम यह भी है कि मात्र 19 एअर जमीन का ही आवासीय पट्टा किया जा सकता है, मगर इस मामले में सारे नियमों को ताक पर रखकर पांच बिस्वा यानी 63 एआर जमीन आंवटित कर दिया गया। इसकी जब शिकायत हुई तो डीएम अरविंद कुमार सिंह ने एडीएम को जांच का आदेश दिया। एडीएम ने एसडीएम सदर, बीडीओ और डीएसओ से रिपोर्ट मांगी। इसी बीच तहसीलदार अनिल कुमार रस्तोगी ने एसडीएम को रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में अनियमित रूप से जमीन आवंटन कराने के मामले में लेखपाल और उनके पिता को दोषी मानते हुए जमीन निरस्त करने की सिफारिश की। इस रिपोर्ट के आधार पर पहले एसडीएम सदर न्यायालय में वाद कायम हुआ, उसके बाद प्रधान और नगई को नोटिस जारी किया गया। एसडीएम सदर कीर्तिप्रकाश भारती ने बताया कि इस मामले में नियम विरुद्ध जमीन आवंटन किया गया। प्रधान और लेखपाल के पिता नगई को चार अक्टूबर को हाजिर होने के लिए नोटिस जारी किय गया है।
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