गोरखपुर।
इस दशहरे पर आपका एक यूनिट खून ‘मौत के रावण’ को मात देकर चार जानें बचा सकता है। ऐसे में रक्तदान कर आप महादानी बन सकते हैं। राष्ट्रीय स्वैच्छिक रक्तदान दिवस पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ एक अक्टूबर को जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर का आयोजन कर रहा है। इसमें रक्तदाताओं को प्रमाणपत्र एवं प्रशस्ति पत्र भी दिए जाएंगे।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसके यादव के मुताबिक रक्तदान न सिर्फ दूसरे की जान बचाता है, बल्कि इसका लाभ रक्तदाता की सेहत को भी मिलता है। रक्तदान करने से व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। ऐसे में लोगों को रक्तदान से जुड़ी अफवाहों को दरकिनार कर इस बेहद पुनीत काम को करना चाहिए। बताया कि ब्लड बैंक में कई महादानी ऐसे हैं जो दर्जन भर से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं। जरूरतमंद के लिए ये जरूरी काम छोड़कर भी आ खड़े होते हैं।
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इन नंबरों पर ले सकते हैं जानकारी
रक्तदान शिविर से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए 9918909700 और 9161616164 पर आप कॉल कर सकते हैं। एक अक्टूबर को सुबह नौ बजे जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचकर इच्छुक लोग रक्तदान कर सकते हैं।
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‘छोटे योगदान’ से महादानी बने विनय
- 21 बार रक्तदान कर चुके विनय दूसरों को भी समझाते हैं इसके फायदे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
‘इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान समाज के लिए कुछ करने की सोचकर पहली बार रक्तदान किया। इससे जो संतोष मिला उसने बार-बार रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान पांच बार, तो इंफोसिस की सेवा के दौरान आधा दर्जन बार रक्तदान किया। इसके बाद शहर में बिजनेस शुरू किया, लेकिन रक्तदान करने का कोई मौका यहां भी नहीं छोड़ता।’ 21 बार रक्तदान कर चुके विनय सिंह (30) यह कहते हुए इस महादान को समाज के प्रति अपना छोटा सा योगदान बताते हैं। उनके इस ‘छोटे योगदान’ ने कइयों की जान बचाई है।
विनय न सिर्फ खुद नियमित रक्तदान करते हैं बल्कि औरों को भी इसके फायदे समझाते हैं। अपना हो या कोई पराया, इस महादानी ने कभी भेद नहीं किया। जब किसी जरूरतमंद ने संपर्क किया तो उसके लिए विनय सिंह खून देने पहुंच गए। ऐसा मौका न आया तो स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में जाकर भी खून दान किया। हुमायूंपुर निवासी विनय ने पढ़ाई पूरी कर शहर के विजय चौक के पास जब अपना कारोबार जमाया तो काफी व्यस्त हो गए। इसके बाद भी रक्तदान करना नहीं भूले। सिलसिला आगे बढ़ता गया और अब तक वह 20 बार महादान कर चुके हैं। इस बीच उन्होंने अपने 10 मित्रों को रक्तदान के लिए प्रेरित भी किया। फायदे समझाए और शंकाओं को दूर कर उनसे भी रक्तदान कराया। इनमें से चार तो नियमित रक्तदाता बन चुके हैं।