इंसेफेलाइटिस और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों पर अगर लापरवाही हुई तो इसकी जवाबदेही सीएमओ और जिलाधिकारी की होगी। अधिकारियों को आंकड़ों के जाल के बाहर निकलकर जमीनी हकीकत स्वीकार करनी होगी और बीमारी को दूर करने के लिए प्रयास करना होगा। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर इन बीमारियों के निशुल्क उपचार की व्यवस्था की जाए। सीएमओ की जिम्मेदारी है कि वह प्रतिदिन सामुदायिक स्वास्थ्य केद्रों पर भ्रमण कर वहां उपचार के संबंध में जानकारी लें। अगर इलाज के अभाव में किसी बच्चे की मौत हुई तो जो दोषी मिला उस पर कार्रवाई तय है। उक्त बातें रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कॉलेज के 100 बेड वाले इंसेफेलाइटिस वार्ड के निरीक्षण के दौरान कही।
मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बाद मेडिकल कॉलेज पहुंचे योगी आदित्यनाथ पूरे रौ में दिखे। हालांकि गोरखपुर के इस बार के दो दिवसीय दौरे में भी उनका मेडिकल कॉलेज जाने का कार्यक्रम शामिल नहीं था। दोपहर करीब तीन बजे मेडिकल कॉलेज के इंसेफेलाइटिस वार्ड पहुंचे सीएम ने वार्ड में भर्ती मरीजों से मिल उनके परिजनों से चिकित्सकीय सुविधा के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने एडी हेल्थ पुष्कर आनंद से इंसेफेलाइटिस और डेंगू के हालात के बारे में बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने हिदायती लहजे में कहा कि अधिकारी पहले की तरह आंकड़ों के फेर में न पड़ें, जमीनी हकीकत समझें और स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर उपचार, निदान की व्यवस्थाएं मुकम्मल कराएं।
उन्होंने कहा कि अगर सामुदायिक केंद्रों पर किसी डॉक्टर को इन गंभीर बीमारियों के इलाज में दिक्कत आए तो वह सीधे जिला अस्पताल फोन कर पूछे। ऐसे ही अगर जिला अस्पताल के डॉक्टर को इलाज में दिक्कत आए तो वह किसी भी समय मेडिकल कॉलेज फोन कर जानकारी ले सके, ऐसी व्यवस्था बनानी होगी। इस दौरान कमिश्नर अनिल कुमार, जिलाधिकारी राजीव रौतेला, मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. राजीव मिश्रा, इंसेफेलाइटिस वार्ड के नोडल अधिकारी डॉ. कफील, सीएमओ रवींद्र कुमार मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने टोकन सिस्टम का किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में टोकन सिस्टम का भी उद्घाटन किया। जल्द ही सभी ओपीडी में यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। डॉ. कफील ने बताया कि कुछ दिनों पहले अपर मुख्य चिकित्सा सचिव अनीता भटनागर ने मेडिकल कॉलेज की सभी ओपीडी में 10 जुलाई तक टोकन सिस्टम लगाने को कहा था। मेडिकल प्रशासन ने एक दिन पहले ही 100 बेड वार्ड वाले अस्पताल के एनआईसीयू, पेडियाट्रिक और गायनी विभाग में टोकन सिस्टम की शुरूआत कर दी है।
नियुक्त हों नोडल अधिकारी
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य महकमे के अधिकारियों से कहा मेडिकल कालेज में इंसेफेलाइटिस और डेंगू के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर एक विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती की जाए। डॉक्टर का मोबाइल फोन नंबर जिले के सभी सामुदायिक केंद्रों के साथ जिला अस्पताल में भी दर्ज रहे। ग्रामीण इलाकों में आने वाले मरीजों को वहां इलाज मुहैया कराई जाए, और अगर उन्हें इलाज में कोई दिक्कत आए तो वो नोडल अधिकारी को फोन कर जानकारी ले सकें ।
स्वच्छ जल की व्यवस्था कराए जिला प्रशासन
मेडिकल कॉलेज के दौरे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने माना की जिले में सफाई व्यवस्था को लेकर सब सही नहीं हैं। बैठक में उन्होंने कहा कि गोरखपुर से भी एक जेई का मरीज सामने आया है। इसका मतलब है कि यहां के पानी में गंदगी है। उन्होंने पास ही बैठे जिलाधिकारी की तरफ इशारा करते हुए इस समस्या को जल्द दूर करने को कहा।
आनन-फानन में की साफ-सफाई
मेडिकल कॉलेज में मुख्यमंत्री का पहले से कोई कार्यक्रम तय नहीं था। इससे मेडिकल प्रशासन भी परिसर में गंदगी से बेपरवाह अपने ढर्रे पर काम कर रहा था। अचानक से सीएम के आने की सूचना पर फौरन दो सफाई कर्मियों को लगाकर गेट पर पसरे गंदगी कोह हटाया गया। परिसर में मौजूद लोगों ने इस साफ-सफाई पर जमकर चुटकी ली।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दिया छह सूत्री मांग पत्र
71245000 रुपये की लागत से इलाज के उपकरण
59640000 रुपये की दवाएं ( कुल 349187800 रुपये का बजट, इसमे इसके अतिरिक्त वेतन भी)
5 माह से एलआईसीयू में कार्यरत एनआरएचएम कर्मियों के वेतन का भुगतान
निकाली गई 10 संविदा नर्सों को तत्काल समायोजित कर उनके वेतन का भुगतान हो
रिक्त पड़े डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों की तैनाती की जाए
एनआरसी सेंटर में रिहेबिलेटेशन सेंटर के संबंध में
लोग बोले
मुख्यमंत्री जी के आने से उम्मीद और बढ़ गई है। सुबह बेटी रागिनी (5) की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज लेकर आई थी। यहां इलाज तो चल रहा है लेकिन डर बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने पास आकर बेटी का हाल चाल लिया। बिटिया अगर स्वस्थ्य होती तो योगी को देखकर खुश हो जाती।
- उर्मिला देवी
बेटी शीला को शनिवार रात 10 बजे भर्ती कराया था। मुख्यमंत्री ने मेरी बच्ची का भी हाल पूछा। अच्छा लगा प्रदेश के मुख्यमंत्री एक-एक कर बच्चों का हाल ले रहे थे। उन्होंने मुझसे पूछा, इलाज कैसा हो रहा है बिटिया का। पास के खड़े डॉक्टर से भी इलाज के तरीके और दवाओं के बारे में जानकारी ली।
- राम आशीष