ग्राउंड रिपोर्ट---
सामने था गांव, जाने में फूल रहे थे हाथ-पांव
- कटसिकड़ा चौराहे पर दो किमी पानी में सफर के बाद धारा देखकर सहमे ग्रामीण
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर।
राप्ती और गोर्रा की बाढ़ से डूबे दोआबा के गांवों में हालात भयावह है। अपने परिवार को बाढ़ में फंसा होने की खबर पाकर मुंबई से चार युवा यहां पहुंचे तो उनकी हिम्मत जवाब दे गई। बाढ़ में डूबे गांव रानापार जाने के लिए ये युवा कमर तक पानी में दो किलोमीटर चलकर कटसिकड़ा मोड़ तक पहुंच गए, लेकिन आगे पानी की धारा देखकर हौसला हार गए।
सुबह 11 बजे धारा का रौद्र रूप देखकर रानापार के जामबली, मनोज कुमार और आशुतोष जायसवाल ने धैर्य से काम लिया और वहीं रुककर नाव का इंतजार करने में भलाई समझी। धीरे-धीरे यहां करीब 15 लोग जमा हो गए। ये सब नेकवार पुल से पानी में चलकर ढाई-तीन किलोमीटर की परिधि में डूबे अपने गांवों तक जाने के लिए निकले थे। लेकिन दो किलोमीटर बाद ही पानी के वेग ने हिम्मत पस्त कर दी थी। गोड़ौर के शिवनरायन एक दिन पहले नाव से बाहर आए थे। अब वापस जाने के लिए नाव न मिली तो पैदल ही निकल पड़े थे। धारा के आगे असहाय होकर सुबह से शाम हो गई तो शिवनरायन परिवार और मवेशियों की चिंता में परेशान हो गए। कपरफोरवा के संगम यादव भी 11 बजे से परेशान थे, लेकिन धारा के आगे उनका बस नहीं चल रहा था। आसपास से जब एनडीआरएफ की बोट बचाव एवं राहत कार्य के लिए जाती तो ये युवक चिल्लाने लगते, लेकिन बचाव दल इन्हें अनदेखा कर उस ओर बढ़ जाता, जहां हालात काफी खराब थे। शाम पांच बजने तक कटसिकड़ा मोड़ पर इनकी तरह करीब 20 लोग जमा हो चुके थे, लेकिन कोई भी आगे जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। ये दूर से कभी अपने गांव को निहारते तो कभी पास में बने एक मकान में जाकर बैठ जाते। शिवनरायन सभी को बता चुके थे कि यहीं थोड़ी दूर पर मंगलवार को जलधारा किस तरह युवक को बहा ले गई थी।
ईंट-पत्थर सहकर भी जरूरतमंदों की कर रहे मदद
एनडीआरएफ, पीएसी और पुलिस को बाढ़ बचाव में अराजकतत्वों को भी झेलना पड़ रहा है। कई जगहों पर ऐसे अराजकतत्व बचाव दल के आगे दिक्कत खड़ी कर रहे हैं। गुरुवार को एक जगह इसी तरह अराजकतत्वों की ओर से फेंके गए ईंट-पत्थर से बचाव दल के लोग घायल हुए थे। हालांकि, इन अराजकतत्वों की हरकतों को नजरअंदाज कर बचाव दल अपना ध्यान सिर्फ बचाव एवं राहत कार्य को अंजाम देने पर केंद्रित किए हुए है।