गोंडा। कोरोना काल में स्कूल बंद होने से शिक्षकों ने स्मार्ट फोन के जरिए ऑनलाइन पढ़ाई का तोड़ निकाला। शिक्षक स्कूल में पहुंचकर बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दे रहे हैं। कई बच्चों के पास स्मार्ट फोन न होने से पढ़ाई में बाधा आ रही थी।
गांव के शिक्षित युवाओं को शिक्षकों को जोड़ा और उन्हें प्रेरणा साथी बनाया। अब गांव के पढ़े लिखे युवाओं को जोड़कर छात्रों तक शिक्षक पहुंच रहे हैं। 199 परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों ने अब तक 750 युवाओं को प्रेरणा साथी बनाया है। उनके जरिए बच्चों से जुड़ने का प्रयास कर रहे हैं। ब्लाक के खंड शिक्षाधिकारी आनंद प्रकाश सिंह भी लगातार शिक्षकों के बीच पहुंचकर प्रोत्साहित कर रहे हैँ।
बीते दो सालों से स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई बंद है। शिक्षकों की चिंता लाजिमी है कि बच्चों की पिछड़ चुकी पढ़ाई को कैसे आगे बढ़ाया जाए। खंड शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश सिंह भी मानते हैं कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
स्कूल खुले पांच दिन ही हुए हैं और शिक्षकों ने 750 प्रेरणा साथियों को जोड़कर उनके जरिए बच्चों तक जुड़ने का खाका तैयार कर लिया है। अभिभावकों को जागरूक कर बच्चों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। अमर उजाला ने कुछ स्कूलों की गतिविधियों को भी परखा और शिक्षकों के प्रयास को सराहा।
कंपोजिट विद्यालय इमरती विशेन तथा प्राथमिक विद्यालय विमौर में खंड शिक्षाधिकारी आनंद प्रकाश सिंह ने वहां पढ़ाई की तैयारियों को परखा। कंपोजिट विद्यालय इमरती विशेन में 293 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। यहां पर प्रधानाध्यापिका पूनम श्रीवास्तव, सहायक अध्यापिका निशा सिंह, अर्चना रानी, विश्वनाथ साहू, शैलजा तोमर, शैफाली उपाध्याय, शिक्षा मित्र गुंजन मिश्रा, मिथिलेश कुमारी, श्वैता शर्मा आनलाइन पढ़ाई कराने की तैयारी में जुटी रहीं।
बीईओ ने ई- पाठशाला के साथ ही सर्वे के कार्य के बारे में जानकारी दिया। प्राथमिक विद्यालय विमौर में 77 छात्र, छात्राएं नामांकित हैं। प्रधानाध्यापिका निशा वर्मा तथा सहायक अध्यापिकाएं रेनू सिंह यहां पर पढ़ाई की तैयारी के साथ ही पौधरोपण करके पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते मिलीं।
स्कूलों की शिक्षिकाओं ने यह जरूर माना कि बिना बच्चों को स्कूल बुलाए ढंग से पढ़ाई नही हो पा रही है। सामुदायिक सहयोग से बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। प्राइमरी स्कूल विमौर की प्रधानाध्यापिका निशा वर्मा कहती हैं कि स्कूल में 25 व्हाटसअप ग्रुप से बच्चे जुड़े हैं, जिन्हें ऑनलाइन पढ़ाया जा रहा है।
वहीं सहायक अध्यापिका निशा सिंह कहती हैं कि जिन बच्चों के पास स्मार्ट फोन नही हैं उनसे जुड़ने के लिए आसपास के लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। कंपोजिट स्कूल की सहायक अध्यापिका अर्चना रानी कहती हैं कि जो परिस्थिति है उसके अनुसार काफी सतर्कता के साथ काम किया जा रहा है, परिणाम बेहतर लाने का प्रयास हो रहा है। शिक्षिक रेनू सिंह कहती हैं कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए हर स्तर से प्रयास हो रहा है।