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आधी रात से थम गये एंबुलेंस के पहियें, बचैंन हो उठे पांच सौ मरीज

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-गोंडा में चौपाल सागर के पास गाड़ी खड़ी कर धरना देते एंबुलेंस कर्मी। - फोटो : GONDA
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गोंडा। समायोजन के साथ मानदेय बढ़ाए जाने की मांग को लेकर आंदोलित एंबुलेंस कर्मचारियों कर्मियों ने सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में काम काज ठप कर विरोध प्रदर्शन किया। इससे सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय व्यवस्था प्रभावित होने से मरीजों के साथ ही तीमारदारों को खासी परेशानी उठानी पड़ी।
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रविवार की आधी रात से ही जिले में संचालित सरकारी सेवा से जुड़ी 78 एंबुलेंसों के पहिए थम गये जिससे जिला अस्पताल, महिला अस्पताल समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो पर इलाज के लिए आने-जाने वाले मरीजों को मुसीबत उठानी पड़ी। इस दौरान कई गरीब मरीज निजी वाहनों या बाइक से अस्पताल पहुंचे को मजबूर रहे।
जीवनदायिनी एंबुलेंस कर्मचारी संघ के पदाधिकारी विभिन्न मांगों को लेकर पिछले दो दिनों से आंदोलित हैं। रविवार आधी रात से मांगे पूरी न होने से आक्रोशित कर्मियों ने एंबुलेंस वाहन खड़े कर हड़ताल शुरू कर दी। संघ के पदाधिकारियों ने मांगे पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने के निर्णय किया है।
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नाराज कर्मी एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) से जुड़े कर्मियों को समायोजित करने और मानदेय बढ़ाने सहित अन्य मांगों को पूरा किए जाने की मांग कर रहे हैं। नाराज एंबुलेंस कर्मियों ने गोंडा लखनऊ मार्ग पर चौपाल सागर के पास एकत्र होकर प्रदर्शन किया।
जिले में 102 व 108 की 82 एंबुलेंस चल रही हैं,जो मरीजों को घर से स्वास्थ्य केंद्र और अस्पताल तक पहुंचाती हैं। इनका संचालन जीवीके कंपनी करती थी। बदली व्यवस्था के बाद अब एंबुलेंस संचालन की जिम्मेदारी जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड को सौंप दी गयी है।
जिगित्सा हेल्थ लिमिटेड ने पुराने और अनुभवी कर्मियों को रखने के बजाए नए कर्मियों की भर्ती भी शुरू कर दी है। इससे नाराज एएलएस एंबुलेंस कर्मियों ने शुक्रवार से विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
रविवार को तीसरे दिन जब एंबुलेंस कर्मियों की मांगे पूरी नहीं हुई तो कर्मियों ने देर रात हड़ताल की घोषणा कर दी। जीवनदायनी एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना काल में एंबुलेंस कर्मियों ने कोरोना वॉरियर्स के रूप में जान की परवाह किए बगैर सेवाएं दीं।
मांग की गयी कि एंबुलेंस कर्मियों को जब तक नेेशनल हेल्थ मिशन के अधीन नहीं किया जाता है तब तक न्यून्तम मजदूरी तथा चार घंटे की ओटी देने सहित अन्य मांग को पूरा किया जाए।
जिले में 102 व 108 की 82 एंबुलेंस संचालित हो रही है। 102 की एंबुलेंस जननी सुरक्षा योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को जिला महिला अस्पताल लाते हैं और फिर प्रसव के बाद इन महिलाओं को उनके घर तक छोड़ती हैं।
इसी तरह 108 वाली एंबुलेंस जिला अस्पताल में महिला एवं पुरुष रोगियों को लेकर आती हैं और रिफर होने पर उन्हें लखनऊ व अन्य अस्पतालों में ले जाती हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट छह वाली आधुनिक एंबुलेंस गंभीर बीमार रोगियों को संबंधित अस्पताल ले जाकर भर्ती कराती हैं। एक आंकड़े के मुताबिक यह एंबुलेंस हर रोज औसतन 500 रोगियों को हर रोज अस्पताल लाती और ले जाती हैं।
संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्र ने बताया कि कि हड़ताल के दौरान भी मरीजों को परेशानी से बचाए रखने के लिए चार एंबुलेंस को मरीजों की सेवा में लगाए रखा गया। यह एंबुलेंस सड़क हादसे या अति गंभीर मरीजों को सेवाएं देने में दिन भर जुटी रही।
दूसरी तरफ सीएमओ डा. राधेश्याम केसरी ने बताया कि एंबुलेंस कर्मियों के काम काज न करने से स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा। जरूरतमंदों को जिला अस्पताल की एंबुलेंस की मदद से अस्पताल लाने व घर भिजवाने की व्यवस्था करायी गयी। एंबुलेंस कर्मियों की समस्याओं का निस्तारण प्रदेश स्तर पर ही संभव हो सकता है।
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