गोंडा। शासन की ओर से तय किए गया गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य को इस बार मंडी का भाव ही मात दे रहा है। इस बार सरकारी केंद्रों पर किसानों का गेहूं 2015 रुपये प्रति क्विंटल में बिकेगा तो वहीं मंडी के आढ़त पर किसानों को गेहूं का भाव 2050 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है।
जिले में पहली अप्रैल से एमएसपी पर गेहूं की खरीद शुरू कर हो गई है, लेकिन पांच दिन बीतने के बाद भी किसी क्रय केंद्र पर बोहनी नहीं हुई। मंडी के आढ़ती इस बार सरकारी मूल्य से अधिक दामों पर गेहूं खरीद करने की बात कह रहे हैं। शासन की ओर इस बार विगत वर्ष के सापेक्ष 40 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2015 रुपये कर दिया है, जबकि मंडी में आढ़ती 2050 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से गेहूं की खरीद कर रहे हैं। शासन की ओर से जिले को मिले 98 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा कर पाना मुश्किल होगा। डिप्टी आरएमओ ने बताया कि किसानों ने गेहूं की मढ़ाई नहीं की, इस लिए केंद्रों पर गेहूं आना नहीं शुरू हुआ। किसानों से संपर्क कर उन्हें सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए जागरूक किया जाएगा।
किसान बोले, कम है सरकारी मूल्य
दरियापुर हरदो पट्टी के किसान सुधांशु ने बताया कि अभी अधिकांश किसानों के गेहूं की मड़ाई नहीं हुई, वहीं क्रय केंद्र से अधिक दामों में आढ़तियों की ओर से गेहूं खरीदा जा रहा है। सरकार ने जो मूल्य का निर्धारण किया है वो कम है। इसलिए जिन किसानों का गेहूं तैयार है वह मंडी की ओर रुख कर रहे हैं। भानपुर के रहने वाले किसान रामलखन ने कहा कि सरकार जो मूल्य निर्धारित किया गया है वह बहुत कम है। डीजल और खाद के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में क्रय केंद्रों पर फसल का वाजिब मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
जिले में 116 क्रय केंद्रों पर खरीद शुरू कर दी गई है, लेकिन अभी तक किसी सेंटर पर किसान गेहूं बेचने नहीं आए। किसानों से संपर्क करने पर बताया गया कि अभी तक मड़ाई शुरू नहीं हुई है इसलिए किसान केंद्र पर नहीं पहुंच रहे हैं। प्रज्ञा मिश्रा, डिप्टी आरएमओ