शादी अनुदान की ऑनलाइन प्रक्रिया पर अधिकारियों की लापरवाही भारी पड़ रही है। इस लापरवाही से आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं हो रहा है। इससे शादी अनुदान की 4593 फाइलें अटकी हुई हैं। हालत यह है कि सात माह बीत जाने के बावजूद समाज कल्याण विभाग अब तक एक भी आवेदक को शादी अनुदान का लाभ नहीं दे सका है।
शादी अनुदान के लिए सरकार ने नए वित्तीय वर्ष से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया के अंतर्गत आवेदक को अनुदान पाने के लिए अपना आवेदन पत्र समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन करना था।
इसके बाद संबंधित तहसील के उपजिलाधिकारी व खंड विकास अधिकारी को इन आवेदन पत्रों का सत्यापन कर उनकी हार्ड कापी समाज कल्याण विभाग में जमा की जानी थी। नए वित्तीय वर्ष में जिले भर के 6124 लोगों ने अपनी बेटी के विवाह में सरकारी मदद की आस लेकर ऑनलाइन आवेदन कर रखा है, लेकिन सत्यापन की जिम्मेदारी पाने वाले अधिकारी इनके अरमानों पर पानी फेर रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग के बार-बार पत्राचार के बावजूद इन आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि अनुदान के लिए आए 6124 आवेदन पत्रों में से अभी तक महज 1531 आवेदन पत्रों का सत्यापन किया गया है, जबकि जिले के चारों तहसील में उपजिलाधिकारी स्तर पर 310 आवेदन पत्र व 16 विकास खंडों में खंड विकास अधिकारी स्तर पर 3995 आवेदन पत्र सत्यापन के अभाव में लंबित पड़े हुए हैं।
इसके अलावा जिन आवेदन पत्रों का सत्यापन हो भी गया है, उनमें से अधिकतर आवेदनों के सत्यापनों की हार्ड कापी अभी भी समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध नहीं कराई गई है। जिसके कारण समाज कल्याण विभाग वित्तीय वर्ष के सात माह बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आवेदक को विवाह अनुदान का लाभ नहीं दे सका है। अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा इस योजना के तहत आवेदन करने वाले आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।
शासन ने विवाह अनुदान के लिए आने वाले आवेदन पत्रों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए थे और आवेदकों को जल्द से जल्द सहायता मिल सके, इसके लिए 20 लाख रुपये की राशि का भी आवंटन कर दिया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं हो सका और इस राशि का वितरण नहीं हो सका। इसके बाद से ही यह धनराशि समाज कल्याण विभाग के खाते में ही डंप पड़ी है।