बीते दिनों हुई बारिश के चलते राप्ती नदी रविवार को लाल निशान पार कर गई है। नदी खतरे के निशान से करीब पांच सेमी ऊपर बह रही है। बाढ़ के चलते करीब 50 गांव पानी से घिर गए हैं। 15 गांवों में पानी भर गया है। इससे इन गांवों की करीब 30 हजार आबादी प्रभावित है। डेढ़ हजार एकड़ फसल तथा पशुओं का चारा पानी में डूब गया है। पीड़ितों के समक्ष खाने व रहने का संकट उत्पन्न हो गया है। प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत आदि न कराने से प्रभावित ग्रामीणों में आक्रोश है।
रविवार को राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से ऊपर 104.670 मीटर पहुंच गया है। बाढ़ के चलते सदर, तुलसीपुर तथा उतरौला तहसील क्षेत्र के करीब 50 गांव पानी से घिर गए हैं। 15 गांवों में राप्ती नदी का पानी घुस गया है। सदर तहसील के चौका कला तथा केतारपुरवा गांव के लोग बाढ़ के चलते सामान सहित गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं।
स्थानीय निवासी गौरीशंकर ने बताया कि बाढ़ के चलते घर छोड़कर सुरक्षित स्थान पर जाना ही एक मात्र विकल्प है। वर्ष 2015 में आई बाढ़ में उतरौला तहसील के चंदापुर गांव के निकट क्षतिग्रस्त हुए बांध की मरम्मत न होने से रविवार को गांव में बाढ़ का पानी घुस गया है।
इसके अलावा क्षेत्र के अल्लीपुर बुजुर्ग, बाघाजोत, मिलौली, पाला, बभनपुरवा, चुचुहिया, फत्तेजोत, परसौना व महुवाधनी सहित क्षेत्र के करीब 35 गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित हो गए हैं। बाढ़ आने के बाद जिला प्रशासन की तंद्रा भंग हुई है।
सदर एसडीएम इंद्रभूषण वर्मा ने रामपुर तथा नौबस्ता गांव के निकट कटान की जद में आए तटबंध का निरीक्षण किया तथा तटबंध को बचाने के निर्देश मातहतों को दिए। एसडीएम के मुताबिक बाढ़ से अभी कोई गांव प्रभावित नहीं हुआ है। उधर, उतरौला तहसील क्षेत्र के लोगों को बाढ़ से बचाने के लिए उतरौला में बनाई गई बाढ़ चौकी बीज गोदाम में रविवार को ताला लटका रहा।
राप्ती नदी में आई बाढ़ के चलते गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग के दतरंगवा व भुसैलवा डिप पर बाढ़ का पानी भर जाने से भारी वाहनों का आवागमन ठप हो गया है। कुछ लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा कर रहे हैं। बाढ़ के चलते न्यौरी, दतरंगवा, सिंहावापुर, भुसैलवा तथा महरी सहित 15 गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है।