पुलिस लाइन में आयोजित बैठक को संबोधित करते आईजी विजय मीणा।
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जिले की 11वीं योजना में 1836 और 12वीं योजना में स्वीकृत 5706 मजरों के विद्युतीकरण को लेकर शनिवार को पावर कॉर्पोरेशन के एमडी कैंप कार्यालय पर जिला विद्युत समिति की हाई लेवल मीटिंग हुई। इस मीटिंग का सबसे बड़ा मुद्दा 11वें प्लान में समाज कल्याण संस्था के पांच करोड़ रुपये का काम कराकर 21 करोड़ 50 लाख रुपये भुगतान लेने का रहा। जिस पर समिति के अध्यक्ष व संयोजक ने नाराजगी जताते हुए तत्काल प्रभाव से समाज कल्याण के भुगतान पर रोक लगा दी है।
वहीं आरजीजीवीवाई से एप्रूव्ड थर्ड पार्टी के साथ ही विभागीय एजेंसियों को समाज कल्याण के कामों की जांच के आदेश भी दिए गए हैं। जबकि विद्युतीकरण में फिसड्डी साबित हो रही एजेंसी समाज कल्याण से इसका काम लेकर किसी दूसरी एजेंसी को देने और एजेंसी की ओर से टेंडर के समय लगाई गई बैंक गारंटी की भी जांच कराने को कहा गया है। वहीं, 12वें प्लान में काम करने वाली कार्यदायी संस्थाओं को सितंबर तक सारे खंभे गाड़कर उन पर तार खींचने और लाइन चालू करने के लिए निर्देशित किया गया।
पावर कॉरपोरेशन से 300 व उससे ऊपर की आबादी वाले 1836 मजरों के विद्युतीकरण का ठेका लेने के बाद समाज कल्याण ने इसका काम पेटी कांट्रैक्टरों को बांट दिया। जिसमें पहला ठेका ओमवीर को मिला और ओमवीर ने इसका काम ओम बिल्डर्स को दे दिया। अब उसी काम को ओेमवीर फिर से ओम बिल्डर्स से लेकर किसी दूसरे बिल्डर को देने जा रहे हैं। जिसे लेकर ओमवीर और ओम बिल्डर्स के बीच विवाद की नौबत पैदा हो गई है। वहीं मुख्यालय पर बनाए गए गोदाम को भी नवाबगंज शिफ्ट किए जाने की बात चल रही है। जिससे जिले में होने वाले 1836 मजरों के विद्युतीकरण में पेंच फंस गया है।
शनिवार को पावर कॉरपोरेशन के एमडी कैंप कार्यालय पर हुई जिला विद्युत समिति की बैठक में जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन अपने पूरे तेवर में नजर आए। उन्होंने मुख्य अभियंता हर्ष मुंशी के जवाबों से नाखुश होकर उनसे कहा कि जब कार्यदायी संस्थाओं से निपटने की पावर नहीं है तो फिर आज तक इस पूरे मामले में जिला प्रशासन को शामिल क्यों नहीं किया गया।
जिले में 11वीं योजना के तहत होने वाले 1836 मजरों के विद्युतीकरण के लिए भारत सरकार से पावर कॉरपोरेशन को 162 करोड़ रुपये अग्रिम दिए जा चुके हैं। जबकि 12वीं योजना में 5706 मजरों के विद्युतीकरण के लिए अभी तक कॉरपोरेशन को 557 करोड़ रुपये में से महज 114 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। जिनसे एक हजार मजरों का भी विद्युतीकरण नहीं किया जा सकता।
सांसद/अध्यक्ष जिला विद्युत समिति बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि समाज कल्याण ने अब तक जिले में विद्युतीकरण का कोई काम नहीं किया है। इसलिए जब तक कंपनी 21 करोड़ 50 लाख रुपये के विद्युतीकरण का काम जिले में पूरा नहीं कर लेती। तब तक उसे एक पैसा विद्युतीकरण के लिए नहीं दिया जाएगा।
रही बात जिले में भारत सरकार से होने वाले विद्युतीकरण की तो इसके लिए कॉरपोरेशन के अधिकारी और प्रदेश सरकार बराबर की दोषी है। जिन्होंने मिलकर आरजीजीवीवाई में होने वाले जिले के 75 सौ मजरों के विद्युतीकरण को अटका रखा है, जिसकी वह तह तक जाकर जांच कराएंगे।