गोंडा। विधानसभा चुनाव में जब भाजपा बूथस्तर पर तैयारी में जुटी रही। मतदाता सूची के एक- एक पन्ने का प्रमुख बनाकर हर मतदाता को साध रही थी। उस समय सपा का संगठन शह और मात का खेल खेल रही थी। टिकट के लिए पैरोकारी तक ही संगठन सीमित रहा। स्थिति यह रही संगठन कमजोर साबित हुआ और सातों सीटों पर हार का मुुंह देखना पड़ा। सभी सीटों पर कमजोर संगठन का भी सामना प्रत्याशियों को करना पड़ा। भाजपा की लहर का नाम लेकर संगठन संतोष करने की तैयारी में अब जुट गया है। हार का मुंह देख चुके प्रत्याशियों के सामने अब मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
सपा ने जिले की सात सीटों पर टिकट देने में देरी की। आदर्श आचार संहिता घोषित होने के बाद सपा ने दो सीटों करनैलगंज से योगेश प्रताप सिंह और कटरा बाजार से बैजनाथ दूबे को ही प्रत्याशी तय किया था। इसमें भी देरी की गई थी। लेकिन इनके टिकट तय थे, इसके अलावा पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने में काफी वक्त लगाया। नामांकन के आखिरी समय पर टिकट तय हो सके थे। इसमें भी संगठन की ओर से पैरोकारी में लापरवाही सामने आई। सदर से सूरज सिंह का टिकट तय तो किया गया, लेकिन तरबगंज से पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह के बेटे के टिकट पर फैसला नहीं हो सका। तरबगंज से राम भजन चौबे को टिकट दिलाने के दांवपेंच में संगठन और पूर्व मंत्री पंडित सिंह के परिवार के सदस्य आमने- सामने तक आ गए।
भले ही खामोशी साधकर सदर में परिवार के लोग जुटे, लेकिन मन में कहीं न कहीं संगठन की बेरूखी का दर्द आज भी है। इसके अलावा मेहनौन में पूर्व विधायक नंदिता शुक्ला का टिकट तय तो किया, लेकिन टिकट से पहले पार्टी में संगठन की लापरवाही से तनाव की स्थिति रही। सपा में कमलेश निरंजन को तैयारी करने की पहले छूट दी गई। इसके बाद टिकट न देने पर उनके विरोध में एक बयान से भी बवाल मचा। जिससे कमलेश निरंजन ने भाजपा का दामन थाम लिया। इसी तरह गौरा में पूर्व विधायक राम प्रताप सिंह टिकट मांग रहे थे। पूर्व विधायक के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई। पार्टी हाईकमान की पसंद से संजय विद्यार्थी को टिकट मिला। इसके बाद पूर्व विधायक को साधने में भी संगठन चूक गया और उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया। कटरा बाजार में बैजनाथ दूबे को टिकट मिला, इसी क्षेत्र के मसूद आलम खां को कैसरगंज से पहले टिकट मिला। बाद में उनका टिकट काट दिया गया। इस तरह भाजपा से जंग का ऐलान करने वाली सपा ने नसीहतों के बाद भी गावों तक संगठन को मजबूत नहीं रखा। इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा।
पंचायत चुनाव से भी सपा ने नहीं लिया सबक
पंचायत चुनाव में भाजपा और सपा दोनों चूक किया था। भाजपा ने तो समय रहते सुधार कर लिया। पंचायत के चुनावों के मास्टरमाइंड कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह को जिला पंचायत अध्यक्ष व ब्लॉक प्रमुख के चुनाव की कमान दे दी। इसके बाद भाजपा को शानदार जीत मिली। पंचायत चुनाव में सपा ने भी चूक किया था। बड़ी संख्या में जिला पंचायत सदस्य व बीडीसी जीतने के बाद भी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज नहीं कर सके। सिर्फ एक ब्लॉक तक ही पार्टी सीमित रही। इसके बाद सपा संगठन कई सवालों से घिरा, लेकिन संगठन ने फिर भी सुधार नहीं किया।