जिले के अब तक के इतिहास में शनिवार को पहली बार गोंडा से होकर चलने वाली वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन बजाय डीजल इंजन के इलेक्ट्रिक इंजन से चलेगी। जिसके बाद न सिर्फ इस ट्रेन से सफर करने वाले लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कम समय लगेगा। बल्कि बार-बार फेल होने वाले इंजन से रेलवे को भी छुट्टी मिल जाएगी।
बताते हैं कि शनिवार को इस ट्रेन का संचालन इलेक्ट्रिक इंजन से होने के बाद अगले 10 दिनों के भीतर गोंडा से होकर आने-जाने वाली सारी ट्रेनें भी इलेक्ट्रिक इंजन से चलनी शुरू हो जाएंगी, जिससे यात्रियों को तो सहूलियत मिलेगी ही, साथ में रेलवे के राजस्व को भी फायदा होगा।
1982 में हुई गोंडा रेलवे डीजल शेड की स्थापना के बाद गोंडा रेलवे स्टेशन का नाम पहली बार डीजल लोको को लेकर सामने आया था। लेकिन 34 साल बाद अब इसकी पहचान नए तौर पर इलेक्ट्रिक लोको के रूप में भी की जाएगी।
शनिवार को पहली बार गोंडा रेलवे स्टेशन से होकर चलने वाली वैशाली एक्सप्रेस का इंजन बजाय डीजल होने के इलेक्ट्रिक होगा। जिसकी स्पीड भी पहले के 90 किलोमीटर प्रति घंटा रफ्तार की बजाय 110 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
बताते हैं कि शनिवार को पहली बार वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन के इलेक्ट्रिक लोको से चलने के 10 दिन बाद खुद रेलमंत्री इलेक्ट्रिक लोको का गोरखपुर में उद्घाटन करेंगे। जिसके बाद एक-एक कर गोंडा से आने-जाने वाली हर ट्रेन इलेक्ट्रिक लोको की हो जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक आलोक सिंह ने बताया कि शनिवार को बरौनी से दिल्ली के बीच चलने वाली वैशाली एक्सप्रेस ट्रेन इलेक्ट्रिक इंजन से चलनी शुरू हो जाएगी।
इलेक्ट्रिक लोको चलाने के लिए कानपुर के फजल गंज में 50 साल से कम उम्र के लोको पायलटों को ट्रेंड किया जा रहा है। इस क्रम में अब तक करीब 50 लोको पायलटों को दक्ष किया जा चुका है। सीनियर डीएमई अश्विनी दीक्षित के मुताबिक रेलवे बोर्ड ने इलेक्ट्रिक लोको चलाने के लिए लोको पायलटों की उम्र की सीमा 50 साल से नीचे नियत की है।