गोंडा। बाबू ईश्वर शरण जिला चिकित्सालय में दो करोड़ से ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना की योजना बनी थी। जिससे इलाज के दौरान किसी मरीज की ऑक्सीजन की कमी से मौत न होने पाए। योजना के तहत जिला अस्पताल परिसर में दो करोड़ रुपये की लागत से ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाने के साथ ही ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने का दावा किया गया था। अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर और पीकू वार्ड के आईसीयू से लेकर सभी वार्डों में बेड-टू-बेड मरीजों के लिए ऑक्सीजन की मुहैया कराना था।
मेडिकल ऑक्सीजन गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट को पूरा कराने वाली जल निगम की कार्यदायी कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइनिंग सर्विसेज (सीएनडीएस) ने अस्पताल परिसर का सर्वे कर प्लांट लगाने का स्थान चिन्ह्ति कर दिया है। इस प्रोजेक्ट को लखनऊ की आर क्यूब आर्टिकेट्स एंड एसोसिएट्स कंपनी को कार्य पूरा करना है। अभी तक प्लांट के कमरों का निर्माण हो गया है और पाइप लाइन बिछाने का कार्य भी प्रगति पर है। लेकिन कार्य पूरा नही हो पाया है।
जिला अस्पताल में अलग अलग बीमारी में मरीजों के ऑपरेशन की व्यवस्था है। इसके अलावा गंभीर बीमारी के लिए बच्चों के लिए 10 बेड का आईसीयू बना है। अस्पताल में अलग अलग विभाग के करीब एक दर्जन से अधिक वार्ड बने हैं जहां पर मरीज भर्ती किये जाते हैं। यहां पर दुर्घटना व अन्य बीमारी से पीड़ित करीब 700 से 800 मरीज की रोजाना भर्ती की जाती है। कई मरीज ऐसे सीरियस किस्म के आते हैं जिन्हें उपचार शुरू करने के दौरान ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। ऑक्सीजन के लिए मरीज के पास आक्सीजन गैस सिलेंडर लगाकर ऑक्सीजन देेने की व्यवस्था है। कई बार ऑक्सीजन के लिए जरूरी संयंत्र एकत्र करने के दौरान वक्त लगने पर ऑक्सीजन की कमी से मरीज दम तोड़ देता है। अस्पताल परिसर में ही ऑक्सीजन का प्लांट लगने से ऑक्सीजन गैस की कोई कमी नहीं होगी। इसके अलावा मरीज को बेड पर ही प्लांट से पाइप के जरिये सीधे ऑक्सीजन की सप्लाई तुरंत मिल सकेगी ।
इन कक्षों में पाइपलाइन से होगी ऑक्सीजन गैस की सप्लाई
* ऑपरेशन थे्रटर * पीकू वार्ड * इमरजेन्सी वार्ड * महिला सर्जिकल वार्ड * महिला वार्ड * सर्जिकल वार्ड * मेडिकल महिला वार्ड * मेडिकल पुरूष वार्ड * डेंगू वार्ड * आर्थोपैडिक वार्ड * चिल्डे्रन वार्ड * वर्न वार्ड * आई वार्ड * आईसोलेशन वार्ड * पेईंग वार्ड * प्राईवेट वार्ड ।
इन मरीजों को पड़ती है ऑक्सीजन की जरूरत
मरीज के चोट खाने सांस की बीमारी के अलावा ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। मरीज को किसी भी दशा में अधिक चोट लग जाने पर आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। एक्सीडेंट की हालत में मरीज को हेड इंजरी होने पर ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है। डॉ. डीएन सिंह बताया कि ऑपरेशन के समय मरीज का ब्लड सर्कुलेशन डाउन होने लगता है ऐसे में ओटी में आक्सीजन कम्पल्सरी होना चाहिए। डॉक्टर ने बताया कि जिन मरीज सांस लेने में दिक्कत होती है उन्हें इलाज के दौरान ऑक्सीजन की अधिक जरूरत पड़ती है। अस्पताल में बेड टू बेड ऑक्सीजन की व्यवस्था हो जाने से मरीजों को काफी फायदा होगा। जिला अस्पताल में इलाज में सुविधा होगी।
ऑक्सीजन प्लांट का कार्य हो रहा है। जल्द ही पूरा हो जाएगा। लोगों को आक्सीजन प्लांट से लाभ दिलाने के कार्य प्राथमिकता से कराया जा रहा है। -अरुण लाल, प्रमुख अधीक्षक जिला अस्पताल