सीएचसी मुजेहना से महज दो किलोमीटर दूर स्थित धौरहरा गांव में दो दिन के अंतराल में डायरिया से पीड़ित सगे भाई-बहन ने दम तोड़ दिया। जबकि गांव में छह बच्चे अभी भी इस बीमारी से पीड़ित हैं। बताया जाता है कि चार दिन पहले गांव के शिवाकांत शर्मा ने इसकी सूचना सीएमओ व स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को दी थी, लेकिन सभी अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। उधर, बच्चों की मौत के बाद जब एसओ ने गांव पहुंचकर यहां की वास्तविक स्थिति से सीएमओ को अवगत कराया तो शुक्रवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजकर बीमार बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
चाहें जिलाधिकारी हों या कमिश्नर, शासन हो या प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग के अफसरों पर इनका कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। यही वजह है कि आए दिन इनकी लापरवाही लोगों की जान ले रही है।
ताजा मामला सीएचसी मुजेहना से दो किलोमीटर दूर धौरहरा गांव का है, जहां चार दिन पहले उल्टी-दस्त से गांव में रहने वाले दीनानाथ के दो बच्चे प्रांजली (10) व कृष्णा (8) बीमार हुए थे। गांव के शिवाकांत शर्मा ने इसकी शिकायत उसी दिन सीएमओ और स्थानीय सीएचसी के अफसरों से भी की, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया। जिससे डायरिया से गंभीर रूप से बीमार दीनानाथ की पुत्री प्रांजली व कृष्णा की दो दिन के अंतराल पर मौत हो गई।
जबकि दीनानाथ का एक पुत्र कन्हैया (4), बैजनाथ का डेढ़ वर्षीय पुत्र समर, हरिवंश की चार साल की पुत्री पूजा व हरिहर के दो बच्चे अंशिका (4) व नैतिक (2) अभी भी इस बीमारी से पीड़ित हैं।
गांव में बुधवार देर शाम व गुरुवार को हुई दो बच्चों की मौत के बाद एसओ रामाश्रय राय व उनकी टीम गांव पहुंची और उन्होंने फोन कर सीएमओ को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। जिसके बाद मुख्यालय से स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव भेजकर पीड़ितों का उपचार किया जा रहा है।
वहीं, गुरुवार को सीएचसी से गांव पहुंचे एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता की ओर से क्लोरीन की कुछ टेबलेट भी पीड़ितों में बांटी गईं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की इस लापरवाही से लोगों में आक्रोश व्याप्त है। बता दें कि सीएचसी मुजेहना में इस तरह की कई घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। जिसे लेकर सीएमओ डॉ. अमर सिंह कुशवाहा यहां तैनात चिकित्साधीक्षक डॉ. विवेक मिश्र को अधीक्षक पद से हटा भी चुके हैं। लेकिन उनकी जगह तैनाती पाए डॉ. टीपी जायसवाल ने अभी तक सीएचसी में जॉइनिंग नहीं दी है।