गोंडा। नवाबगंज के तुलसीपुर माझा निवासी महाबीर सिंह हत्याकांड में 17 साल से फरार चल रहे इनामी दो अभियुक्तों को अयोध्या पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया। अयोध्या पुलिस ने दोनों को गोंडा की कोर्ट में पेश किया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
तुलसीपुर माझा निवासी महाबीर सिंह (25) को छह जून 2007 की सुबह साधुवेशधारी दो युवक अपने साथ बाइक पर बैठाकर ले गए थे। ढेमवा मार्ग पर दोनों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर भाग गए थे। परिजनों ने अयोध्या के संजय उर्फ विजय और अरुण दास के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने के प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने बताया कि तफ्तीश के दौरान अरुण दास की नामजदगी गलत पाए जाने पर उनका नाम हटाते हुए प्रकाश में आए एक और साधुवेशधारी सीताराम उर्फ विजय को नामजद किया गया था। बताया कि संजय मूल रूप से बिहार के लखीसराय बड़इया का रहने वाला है। वारदात के बाद वह बिहार भाग गया था। तफ्तीश के दौरान हत्या की वजह मंदिर की कृषि योग्य भूमि और मठ पर कब्जेदारी के विवाद की बात सामने आई थी। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। अदालत ने दोनों आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया था। नवाबगंज पुलिस की रिपोर्ट पर एसपी ने दोनों आरोपियों पर 15-15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र पांडेय ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ एसीजेएम गोंडा ने गैर जमानतीय वारंट जारी किया था। वारदात के तीन साल बाद दोनों अयोध्या में आए और नाम बदलकर एक मंदिर में रह रहे थे। सुरागरसी के बाद तस्दीक होने पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। बताया कि दोनों को गोंडा कोर्ट में पेश किया गया। जहां से 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।