गोंडा। शहर की तर्ज पर गांवों में भी सामुदायिक शौचालय की सुविधा देने की योजना लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। सीडीओ गौरव कुमार ने हलधरमऊ के भुलभुलियापुर में सामुदायिक शौचालय की स्थिति देखा तो दंग रह गए। एक साल से समूह को शौचालय के संचालन की जिम्मेदारी थी। शौचालय कभी खुला ही नहीं है। जिले में 875 सामुदायिक शौचालयों जांच के दायरे में आ गए हैं। इन शौचालयों को समूहों को आवंटित किया गया है। हर माह नौ हजार रुपये दिए जाने की व्यवस्था भी है। इनके हकीकत की पड़ताल शुरू हो गई है।
गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने पंचायतों में सामुदायिक शौचालय निर्माण कराया जा रहा है। दो साल से चल रहे अभियान में बड़े स्तर खेल भी सामने आ रहे हैं। कई गांवों में लाखों रुपये खर्च करके शौचालय तो बना दिए गए लेकिन, उनका ताला नहीं खुलता है। कुछ शौचालय बाहर से तो तैयार दिखते हैं लेकिन, अंदर सीट व अन्य सुविधाएं नदारद हैं। जिले की 1214 पंचायतों में 1083 सामुदायिक शौचालयों के निर्माण होने और 875 शौचालयों का संचालन समूहों के माध्यम से कराया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है।
सीडीओ ने खुद इस सच को भुलभुलियापुर में देखा तो वह भौचक्के रह गए। उन्होंने पंचायत राज विभाग के ब्लॉक व पंचायत अधिकारियों से वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तलब की है। माना जा रहा है कि इस मामले में कई की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एक समूह का चयन निरस्त करने की चेतावनी भी दी है।
मानदेय के साथ ही रखरखाव के लिए मिलता बजट
ग्राम पंचायतों में हर शौचालय की रखरखाव के लिए नौ हजार रुपये दे रही है। सफाई कर्मचारी या केयर टेकर दिन में कम से कम दो बार सफाई करेगा। इसके अलावा बिजली, प्लंबिंग, नल और टोटी की मरम्मत के लिए पांच सौ रुपये प्रति माह और साफ सफाई के लिए झाड़ू, ब्रश, वाईपर, स्पंज, कपड़े, पोछा, बाल्टी, मग आदि के लिए छह माह में एक बार 12 सौ रुपये दिए जा रहे हैं। निसंक्रामक सामग्री साबुन, वाशिंग पाउडर, एयर फ्रेशनर, ग्लब्स, हारपिक, मास्क, दस्ताने और एप्रेन के लिए एक हजार रुपये प्रति माह दिए जा रहे। यूटिलिटी चार्जेज के रूप में पानी, बिजली, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए एक हजार रुपये प्रति माह और अन्य खर्चों के लिए तीन सौ रुपये प्रति माह दिए जा रहे हैं।
सामुदायिक शौचालयों के संचालन कराने की जांच होगी। शौचालयों का संचालन प्राथमिकता पर करानी है। इसमें लापरवाही पर कार्रवाई होगी। गौरव कुमार, सीडीओ