शारदीय नवरात्र की नवमी को मां दुर्गा की नौवीं शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की गई। सोमवार को देवी मंदिरों में उमड़े श्रद्धालुओं ने मां सिद्धिदात्री को चुनरी व नारियल आदि चढ़ाकर उनसे अज्ञानता व असंतोष दूर करने की कामना की। श्रद्धालुओं ने हवन के साथ-साथ कन्याओं की पूजा कर नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति दी।
शक्ति स्वरूप मां दुर्गा की नौवीं शक्ति को मां सिद्धिदात्री के नाम से जाना जाता है। मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें अज्ञान, असंतोष आदि से निकालकर स्वाध्याय, उद्यम, उत्साह, कर्तव्यनिष्ठा की ओर ले जाता है और नैतिक व चारित्रिक रूप से सबल बनाता है।
मार्कंडेय पुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व व वशित्व इन आठ सिद्धियों से परिपूर्ण हैं मां सिद्धिदात्री। भक्तों की तृष्णाओं व वासनाओं को नियंत्रित करके अंतरात्मा को दिव्य पवित्रता से परिपूर्ण करते हुए स्वयं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति देता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने इन्हीं शक्ति स्वरूपा देवी की उपासना कर सभी सिद्धियां प्राप्त की थीं जिसके प्रभाव से उनका स्वरूप अर्द्धनारीश्वर का हो गया था।
देवीपाटन शक्तिपीठ तुलसीपुर में महंत मिथलेश नाथ योगी ने नवमी के दिन हवन कुंड में पूर्णाहुति देकर लोगों के लिए मंगलकामना की। भक्तों ने पवित्र सूर्य कुंड में स्नान कर मां पाटेश्वरी की पूजा की।
नगर के बिजलेश्वरी मंदिर व झारखंडी मंदिर में भक्तों का हुजूम उमड़ रहा। मां दुर्गा की पूजा के बाद भक्तों ने कन्या भोज कराया। जरवा के वाराही देवी मंदिर, कुआना जंगल के सम्मय माता मंदिर, उतरौला के ज्वाला देवी, रहिया देवी, चेतरा माई, बड़की बहिनी थान व काली माता मंदिर सहित सभी प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों ने मां सिद्धिदात्री की पूजा कर आशीर्वाद प्राप्त किया। नवमी पर मंदिरों के साथ ही घरों में भी लोगों ने हवन कर कन्याओं को भोजन कराया।