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Gonda News: बढ़ता रहा बांध का दायरा, सिकुड़ती गई व्यवस्था

Sun, 16 Mar 2025 11:20 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
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करनैलगंज में बांध की मरम्मत करती पोकलैंड मशीन। फाइल फोटो 
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करनैलगंज (गोंडा)। एल्गिन-चरसड़ी बांध और नदी के बीच बसे गांवों के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन का वादा महज भाषण तक सीमित दिखाई दे रहा है। वर्ष 2009 में जब पहली बार बांध कटा तो रिंग बांध बनवाया गया।
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दो वर्ष बाद वर्ष 2011 में जब रिंग बांध कटा तो बांध का दायरा बढ़ाने के लिए स्वीकृति दी गई। जब फिर से बांध कटा तो बांध को मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए। जब नए सिरे से ग्राम नकहरा के बाहर बांध निर्माण का कार्य शुरू हुआ तो ग्रामीणों को बांध की जमीन का केवल मुआवजा दिया गया। वर्ष 2013 से 2015 के बीच बांध का निर्माण हुआ। उस समय प्रदेश सरकार के कई मंत्री समेत मुख्यमंत्री भी बाढ़ की स्थिति देखने पहुंचे थे। बांध के अंदर बसे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापन करने के साथ उन्हें जमीन का पट्टा तथा आवास देने की घोषणा की गई थी मगर आज भी हालात जस के तस हैं। बांध के अंदर बसे ग्रामीणों को बाढ़ आने पर सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा जाता है या फिर नाव की व्यवस्था देकर उनके हालात पर छोड़ दिया जाता है। बाढ़ से घिरे ग्रामीण बांध पर आशियाना बना लेते हैं। मगर किसी बाढ़ पीड़ित को विस्थापन के लिए न तो जमीन का पट्टा मिला न ही आवास की सुविधा ही दी गई।
तहसीलदार अल्पिका वर्मा का कहना है कि ग्रामीण अपना गांव और जमीन नहीं छोड़ना चाहते हैं। बाढ़ के समय ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया जाता है। जानवरों के चारे के साथ बाढ़ पीड़ितों को लंच पैकेट के साथ राशन किट आदि के साथ सहायता प्रदान की जाती है।
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