आत्मनिर्भर बनाने में रहती है अहम भूमिका
बैंकिंग सुविधा कराने के साथ ही बिजली का बिल भी कराती हैं जमा
संवाद न्यूज एजेंसी
गोंडा। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जिले के एक हजार पंचायतों की महिलाओं को तरक्की की नई राह दिखाने में सखी की अहम भूमिका निभा रहीं हैं। चार हजार समूहों की 42 हजार महिलाओं को समूह संचालन में 832 समूह सखी सहयोग कर रही हैं। जिससे समूह की महिलाएं लगातार नए उद्यम शुरू कर रही हैं।
स्वयं सहायता समूहों का गठन गांवों की महिलाओं को एक साथ जोड़कर स्वरोजगार शुरू करने के लिए है। इसके लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन से आर्थिक मदद मिलती है। अब तक चार हजार समूहों की महिलाओं ने स्वराेजगार अपनाकर कार्य शुरू किया है। जिसमें 42 हजार महिलाओं की आय एक लाख वार्षिक से अधिक हो चुकी है। इन समूहों को और सक्रिय करने की पहल तेज हुई है। जिससे समूहों का भी एक संघ बनाकर महिलाएं संयुक्त रूप से उद्योग शुरू करने की तैयारी कर रही हैं। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने बताया कि बीते दिनों लखपति बन चुकी महिलाओं को आर्थिक मदद दी गई है।
समूह की सदस्यों को मिली है कई जिम्मेदारी
- बीसी सखी - 970 - स्थानीय स्तर पर लेनदेन का कार्य
- बैंक सखी - 100 - समूहों को बैंक से ऋण की सुविधा दिलाना
- बिजली सखी - 994 - बिजली बिल जमा कार्य
- समूह सखी - 832 - समूह के कार्य में सहयोग
बेतहर परिणाम, रोजगार भी बढ़े
समूहों की सुविधा के लिए अलग-अलग कार्य के लिए सखी तय की गई हैं। जिनके कार्य से समूह से जुड़ी महिलाओं को सहूलियत मिल रही हैं। इससे योजना को बेहतर परिणाम मिले हैं, वहीं रोजगार भी बढ़े हैं।
-नीलांबुज, जिला प्रबंधक आजीविका मिशन