गोंडा। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज होने के लिए भाजपा नेताओं ने अपनी मुहिम और तेज कर दी है। कुर्सी पाने को भाजपा के पक्ष में 33 सदस्यों को जुटाने की राह अभी चुनौतीपूर्ण दिख रही है।
हालाकि कि पार्टी ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते छह और सदस्यों को अपने पाले में शामिल कर इस चुनौती को आसान बनाने का कार्य किया है।
भाजपा और सपा की ओर से जिला पंचायत चुनाव में प्रत्याशी तो उतारे गए, लेकिन रणनीति में कमी के चलते अध्यक्ष की कुर्सी पाने को जरूरी बहुमत दोनों ही दलों से बहुत दूर रह गया। चुनाव में जीत हासिल करने वाले निर्दलीय सदस्यों को जोड़े बिना अध्यक्ष पद पाने को जरूरी जिला पंचायत के 33 सदस्यों का बहुमत जुटाना कही से भी संभव नजर नही दिखता है।
भाजपा ने रणनीतिकारों ने अपने तेवर ढीले कर छह नवनिर्वाचित निर्दलीय सदस्यों को पार्टी में शामिल करने में सफलता प्राप्त की है। साथ ही कई डीडीसी कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह के संपर्क में बने हुए हैं।
माना जा रहा है कि इस बार भी कैसरगंज सांसद की अगुवाई में ही जिला पंचायत अध्यक्ष पर बैठने वाले का फैसला होगा। भाजपा से टिकट न मिलने पर निर्दलीय जीते महेंद्र सिंह के साथ ही छह सदस्यों ने पार्टी की सदस्यता लेकर संकेत दे दिया कि अध्यक्ष के चुनाव में वह किसके साथ रहेंगे।
टिकट बंटवारे के दौरान सांसद बृजभूषण शरण सिंह की अनदेखी करने वाली भाजपा को अब उन्हीं के भरोसे जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पाने की राह दिख रही है। सांसद से कई ऐसे नवनिर्वाचित सदस्य सीधे संपर्क बने हुए हैं जो अभी भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। वहीं दूसरे दलों की ओर से अध्यक्ष पद पाने की कोई जोड़तोड़ शुरू होती नहीं दिख रही है।
भाजपा ने जिला पंचायत चुनाव में साल 1995 से अहम भूमिका निभाने वाले सांसद बृजभूषण शरण सिंह की शुरूआती दौर से ही अनदेखी की। पार्टी के एक गुट की सक्रियता डीडीसी के टिकट बंटवारे में इस कदर हावी हुई कि कैसरगंज सांसद से जुड़े लोगों को टिकट तक देने से परहेज बरता गया।
सांसद की पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष थीं, फिर भी उन्हें टिकट नही दिया गया। भाजपा के कुछ नेताओं की इस घेराबंदी का असर जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव नतीजों में साफ दिखा।
भाजपा ने 18 सीटें जीतने का दावा किया जो कि अध्यक्ष पद को पाने के लिए जरूरी बहुमत से काफी दूर है। सांसद को सक्रिय करने के बाद छह सदस्य पार्टी में और जुड़ गए। इस तरह वर्तमान में भाजपा के डीडीसी की संख्या 24 हो गयी है और उसे जरूरी बहुमत के लिए नौ सदस्य का समर्थन और चाहिए।
जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। चुनाव की बागडोर पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह ने संभाली थी अब उनके निधन के बाद पार्टी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर दुविधा में फंसी है।
पूर्व मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने इस बार पंचायत चुनाव में किसी को परिवार से खड़ा नही किया था। इसके अलावा पार्टी में भी मनमाने ढंग से उनके क्षेत्र में दो- तीन टिकट दिए गए। जिससे कई सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों को हार का भी सामना करना पड़ा।