गोंडा। मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही जिले में गम, अकीदत और मातम का दौर शुरू हो गया है। पहली मुहर्रम से शहर के विभिन्न इमामबाड़ों में मजलिस, मातम और नजर-नियाज के कार्यक्रम होंगे। शिया समुदाय ने मुहर्रम की तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मुहर्रम का आगाज 29 जिलहिज्जा की रात हुसैनिया बारगाह से निकले जुलूस के साथ हुआ। जुलूस फैजाबाद रोड, वीर अब्दुल हमीद चौराहे होते हुए रगड़गंज सड़क स्थित इमामबाड़े तक पहुंचा, जहां देर रात मजलिस आयोजित की गई। सैयद सगीर आबिद रिजवी ने करबला की शहादत और हजरत इमाम हुसैन की कुर्बानी पर प्रकाश डाला। मजलिस के बाद नजर-ए-मौला का आयोजन हुआ।
पहली मुहर्रम से शहर के विभिन्न इमामबाड़ों में दिनभर मजलिसों का सिलसिला जारी रहेगा। पहली मजलिस सुबह सात बजे इमामबाड़ा तसद्दुक हुसैन में आयोजित होगी। इसके अलावा मोहल्ला इमामबाड़ा, महराजगंज, मालवीय नगर, बस स्टैंड और रकाबगंज स्थित इमामबाड़ों में भी मजलिसें होंगी।
पांचवीं मुहर्रम को शिया समुदाय का पहला जुलूस इमामबाड़ा रकाबगंज से निकलेगा, जबकि आठवीं मुहर्रम को दूसरा प्रमुख जुलूस चौक स्थित इमामबाड़ा तसद्दुक हुसैन से उठेगा। दोनों जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे।
दसवीं मुहर्रम यानी यौमे आशूरा पर ताजिये और अलम के साथ मातमी जुलूस निकाले जाएंगे। विभिन्न इमामबाड़ों से अकीदतमंद मातम करते हुए करबला पहुंचेंगे, जहां ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
मुहर्रम को लेकर प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने विभिन्न मार्गों का भ्रमण कर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा लिया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।