गोंडा। आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर साइबर ठगी के मामले की जांच अब साइबर थाने की पुलिस करेगी। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि साइबर ठगों को योजना के पात्रों की जानकारी कहां से मिल रही थी। कहीं स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा कोई व्यक्ति इसमें मददगार तो नहीं है। हालांकि, पुलिस अभी जांच की बात कह रही है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर करनैलगंज से जुड़े एक मोबाइल नंबर के खिलाफ सात और संबंधित बैंक खाते के खिलाफ 10 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई थी। शिकायतें उत्तर प्रदेश के कई जिलों व महाराष्ट्र की हैं। करनैलगंज कोतवाली की साइबर हेल्प डेस्क के नोडल अधिकारी उपनिरीक्षक शशांक मौर्य ने इस मामले में क्षेत्र के भंभुआ निवासी अनमोल सविता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
तहरीर के मुताबिक, मोबाइल नंबर के खिलाफ नवी मुंबई, बहराइच, खीरी, मुरादाबाद, महराजगंज, बाराबंकी और मऊ से शिकायतें दर्ज हैं। वहीं, बैंक खाते से जुड़ी शिकायतें गोंडा, अयोध्या और गौतमबुद्धनगर समेत कई जिलों तथा महाराष्ट्र के नवी मुंबई और चंद्रपुर से संबंधित हैं।
जांच में पुलिस शिकायतकर्ताओं के बयान, कॉल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन का मिलान करेगी। यह पता लगाने की कोशिश होगी कि योजना के पात्रों से संपर्क करने के लिए जालसाजों को डाटा कहां से मिला। बैंक खाते में आई रकम के लेनदेन की पड़ताल से भी कथित ठगी की कड़ियां जोड़ने में मदद मिल सकती है। विवेचनाधिकारी गौरव सिंह ने बताया कि प्रकरण की जांच साइबर सेल में नियुक्त निरीक्षक स्तर के अधिकारी करेंगे। प्रारंभिक जांच अभी उनके द्वारा की जा रही है।