गोंडा। अंतर जनपदीय तबादले के शिक्षकों से रिलीविंग के लिए वसूली मामले की जांच पूरी हो गई है। जांच समिति ने बीएसए दफ्तर में छानबीन के बाद अधिकारियों-कर्मचारियों से बयान लिए। अपर जिलाधिकारी राकेश कुुमार सिंह ने अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के साथ अभिलेखों की पड़ताल किया। बीएसए ने सीसीटीवी फुटेज के लिए डीबीआर भी सौंप दिया है।
जांच समिति ने दो फरवरी को पूरे दिन चली कवायद की जानकारी हासिल किया। सीसीटीवी फुटेज में पूरे दिन की रिकॉर्डिंग है। डीबीआर से बीएसए दफ्तर में पूरे दिन क्या हुआ, इसकी जानकारी की गई है। इसके अलावा बीएसए के साथ ही वहां कार्यरत कर्मियों के साथ ही सहयोग लगे शिक्षकों के भी बयान लिए गए हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के समंवयकों के बयान भी टीम ने दर्ज किए हैं। इसके अलावा कार्यमुक्ति पाए शिक्षकों की भी फीडबैक लिए जाने की जानकारी मिली है। वैसे तो कोई अधिकारी अभी इस मामले में जानकारी देने को तैयार नही है लेकिन माना जा रहा है कि शिक्षकों की ओर से कुछ दिक्कतों की ओर इशारा किया गया है।
ज्यादातर शिक्षकों को बीआरसी स्तर से दिक्कत होने की सूचना मिलने की फीडबैक आने की संभावना है। बीएसए दफ्तर में देरी की वजह से परेशानी की बात कही जा सकती है। विभागीय सूत्रों की मानें तो मामले में जो भी सच है वह जिलाधिकारी के स्तर से ही बाहर आएगा।
अभी पूरे प्रकरण में जांच रिपोर्ट क्या होगी, यह रहस्य बना हुआ है। इसके अलावा लोगों में उत्सुकता भी है। जिले के अधिकारियों के साथ ही शिक्षकों की निगाहें जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
बीएसए दफ्तर का कोई कर्मचारी जांच पर कुछ बोलने को तैयार नहीं था, बस लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जांच होना अच्छा है। इससे कम से कम से सच्चाई सामने आएगी। जिन लोगों ने भी गलत किया है उन पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।
कर्मियों ने यह माना कि समय कम होने के कारण देरी हुई है और इतनी बड़ी संख्या में पत्रावलियों को चेक कराकर आदेश निर्गत करने में देरी होनी ही थी। लेकिन दो फरवरी को ही कार्यमुक्ति करने के आदेश से देरी हुई है।
बेसिक शिक्षा की जांच के दौरान ही अपर जिलाधिकारी राकेश सिंह ने वित्त एवं लेखा कार्यालय पहुंचकर जांच किया। इसकी खासी चर्चा रही कि जांच में छापा है। अपर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जांच तो की ही जा रही है।
लेकिन वित्त एवं लेखा दफ्तर वह उपस्थिति की जांच करने गए थे। कई विभागों में उपस्थिति की जांच की गई है। जिलाधिकारी दफ्तरों में अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति तय करने के लिए अक्सर जांच कराते हैं। इससे काफी सुधार हुआ है।
स्वेटर खरीद की एक बार जांच होने के बाद दोबारा जांच होने से कई तरह की चर्चाएं हैं। सियासी गलियारों में भी इसकी चर्चा पहुंच गई है। माना जा रहा है कि एक फर्म को स्वेटर का टेंडर न मिलने के कारण जांच कराई जा रही है।
विभाग के लोगों की मानें तो स्वेटर की खरीद प्रक्रिया नियमों के तहत हुई थी। इसमें शासन को एक करोड़ 41 लाख की बचत करके भी दिया गया था। इसकी तारीफ भी हुई कि कम बजट में ही स्वेटर का वितरण किया गया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डा. इंद्रजीत सिंह प्रजापति की छवि बनाने की सारी कवायदों पर उनके मातहतों की करतूत से पानी फिरता दिख रहा है। बीएसए ने स्कूलों को संवारने की पहल के साथ ही शिक्षकों को प्रोत्साहित करने का काम किया। कई लापरवाह शिक्षकों पर कार्रवाई भी की और फर्जी तरीके से नौकरी हथियाने वाले शिक्षकों को बर्खास्त भी किया।
इसके अलावा नई नियुक्तियों में व्यवस्था बनाने में सफल रहे। लेकिन कार्यमुक्ति में चूक गए, उनके मातहतों की लापरवाही ऐसी भारी पड़ी कि पूरा विभाग ही कटघरे में खड़ा हो गया। हर किसी की धड़कनें बढ़ीं हैं कि आगे न जाने क्या होगा। कई अंदेशों से विभाग में लोग सहमे- सहमे नजर आ रहे हैं।