विश्नोहरपुर (गोंडा)। तुलसीपुर माझा में सरयू नदी की बाढ़ हर साल अपना विकराल रूप लेकर आती है। यहां स्थापित अस्पताल बंद हो जाता है। क्षेत्रीय लोगों को स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पाती हैं। हालात यह हो जाते हैं कि लोगों को मवेशियों संग पलायन कर नगर की तरफ जाना पड़ता है।
सबसे बड़े भू क्षेत्र वाले इस गांव में बाढ़ के समय दो दर्जन से अधिक मजरे पानी की चपेट में रहते हैं। गांव में कटान की भी दिक्कत बनी रहती है। कटानकी वजह से राजा फार्म के पास सैकड़ों बीघा खेत पिछले साल पानी में समा गए थे। गांव के विभिन्न मजरों तक जाने वाली दो दर्जन सड़कें पानी के बहाव में जगह-जगह कट गई हैं। कुछ टूट चुकी हैं, पत्थर बाहर आ गए हैं। जिन पर पैदल के साथ वाहन लेकर जाना भी खतरों भरा है।
गांव में स्थित चार परिषदीय स्कूल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पशु चिकित्सालय सब लगभग महीने पर पानी के चपेट में रहते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के परिसर में हर साल पानी भर जाता है, जिससे महीनों तक अस्पताल बंद रहता है। स्वास्थ्य कर्मी सड़क के किनारे बाढ़ चौकी पर इलाज करते हैं। यही नहीं अस्पताल को जाने वाली सड़क पूरी टूट चुकी है, गिट्टियां बाहर आ गई हैं।
प्रधान प्रतिनिधि लालजी सिंह का कहना है कि गांव में बाढ़ से सड़कों व खेतों को भारी नुकसान होता है। कटान रोकने के लिए बांध की आवश्यकता है। सड़कों की मरम्मत के लिए माननीयों से मांग की गई है। चौखड़िया पुल से जाने वाले रास्ते पर टूटी पुलिया के निर्माण का काम शुरू हो गया है।