गोंडा। जिले में 1484 पूजा पांडालों में जगत जननी जगदंबा का दरबार सज गया है। यहां सुबह-शाम पूजन के साथ ही दिन भर जय जयकारे गूंज रहे हैँ। शाम होते ही पूजन पांडाल विभिन्न रोशनी से जगमगा उठता है। इन पांडालों में हर तरफ भक्ति रस की बारिश होती है जहां गोते लगाने के लिए श्रद्धालुओं के जत्थे देर रात तक उमड़ रहे हैं। नवरात्र के सातवें दिन भक्तों ने मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद मांगा।
जिले में 1484 स्थलों पर पूजा पांडाल सज गए हैं जहां देवी मां का दरबार लगा हुआ है। इन पूजा पांडालों में सुबह शाम पूजन के साथ ही दिन भर मां के जयकारे गूंज रहे हैं। शाम होते ही पूजा पांडाल रोशनी व लाइटों में जगमगा जाते हैं। मां की आराधना के लिए शाम होते ही श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है। जिले में जहां मां के नौ रूपों की आराधना की जाती है लेकिन शहर स्थित चुंगी गोदाम के पास कालीबाड़ी प्रांगण में मां के महिषासुर मर्दिनी रूप की ही आराधना की जाती है।
पिछले 63वर्षों से दुर्गा प्रतिमा रखकर अनोखी पद्धति से होने वाला यह पूजन पद्धति बंगाली परंपरा पर आधारित है जिसमें महिषासुर मर्दिनी के स्वरूप की आराधना की जाती है। इस पद्धति की खास बात यह है कि मां को बेटी मानकर उनकी पूजन किया जाता है। पूजन समिति के अध्यक्ष देवाशीष बनर्जी ने बताया कि महिषासुर मर्दिनी के साथ वह लोग गणेश व कार्तिकेय की प्रतिमा रखते हैं। पुराणों के अनुुसार मां ने महिषासुर मर्दिनी का रूप उस समय धारण किया था जब वह अपने पिता के घर जा रही थीं और उन्हें रास्ते में देवताओं के अनुरोध पर शक्तिशाली रूप धारण कर महिषासुर का वध करना पड़ा।
तीन दिन लगता है भोग, महिलाएं करती हैं सिंदूर दान
चुंगी गोदाम के पास होने वाले पूजन में सिर्फ तीन दिन भोग लगता है। यहां सप्तमी,अष्टमी, नवमी को मां को भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके अलावा महिलाएं प्रतिमा विसर्जन के पहले सुहागिन महिलाएं सिंदूर दान करते हुए सिंदूर की होली खेलती हैं।
अन्य धर्मों का भी रहता है सराहनीय योगदान
दुर्गा पूजन में हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिमों का भी सराहनीय योगदान रहता है। अध्यक्ष देवाशीर्ष बनर्जी ने बताया कि दुर्गा पूजन में तमाम मुसिलम भाई भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेेेते हैं । नूूर मोहम्मद, मो.इस्माइल पूजन के लिए जहां सहयोग राशि देते हैं, वहीं कारी साहब अन्य लोग मदद कर पूजन संपन्न कराते है।