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200 पंचायतों के प्रधानों की कुर्सी जानी तय

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गोंडा। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए तय हो रहे आरक्षण से ग्राम पंचायतों की स्थिति का अंदाजा लगने लगा है। 200 से अधिक ग्राम पंचायतों में आरक्षण से सियासी गणित बदलना तय सा हो गया है। इन पंचायतों के सियासी धुरंधरों को उनकी कुर्सी डगमगाते दिख रही है। 25 सालों से ऐसे धुरंधरों ने अपनी चौखट से बाहर प्रधान की कुर्सी नहीं जाने दी।
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अब आरक्षण तय होने के बाद इन गांवों में माहौल भी बदलने लगा है। जहां कुछ दावेदार मतदाताओं को सहेजने में लगे हुए है तो कुछ गणित बिगड़ते ही खामोश बैठ गए है। 28 फरवरी को आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दो मार्च तक पहली सूची जारी होगी। इसके बाद चार से आठ मार्च तक आपत्ति ली जाएगी। इनका निस्तारण 12 मार्च तक होगा और अंतिम सूची 13 मार्च तक जारी की जाएगी। इसके साथ ही आरक्षण की स्थिति साफ हो जाएगी।
पंचायतों के आरक्षण को लेकर गांवों की राजनीति कही गर्म तो कही नरम हो रही है। पंचायत चुनाव के कई दावेदार खुद को ताल ठोंक पाने से वंचित होने पर आरक्षित वर्ग के डमी प्रत्याशियों को तैयार करने में भी जुटे हुए है। ऐसे लोगों की तलाश की जा रही जिस पर पांच साल के लिए दांव खेला जा सके। ऐसी करीब दो सौ पंचायतों के सियासी नेता जुगाड़ लगा रहे हैं।
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उन्हें अंदाजा तो हो गया लेकिन आरक्षण की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आरक्षण को लेकर दावेदारों का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। विभाग की ओर आरक्षण का कार्य तेजी से किया जा रहा था। विभागीय सूत्रों की मानें तो 28 फरवरी तक लगभग आरक्षण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। तीन मार्च तक आरक्षण सूची जारी कर दी जाएगी। इसके बाद अंतिम सूची के लिए 13 मार्च तक का इंतजार करना होगा। फिर पंचायतों के आरक्षण की स्थिति साफ हो जाएगी।
पंचायत दफ्तर में झांक रहे दावेदार
आरक्षण की प्रक्रिया ने तमाम दावेदारों को निराश कर दिया है। आरक्षण के मुताबिक क्या होगा इस पर जानकारी लेने को पूरे दिन विभाग में दावेदारों का तांता लगा रहता है। दावेदार बाबू से लेकर अधिकारियों के चक्कर काट रहे है। जिला पंचायत राज विभाग में इन दिनों अलग माहौल देखने को मिला है। इसके बाद भी चुनाव के दावेदारों को सटीक जानकारी नहीं मिल रही है। इतना जरूर है कि आरक्षण के लिए तय किए मानकों से गांवों की तस्वीर बदलने की झलक दिख रही है। फिलहाल हर हाल में दावेदार अपने पंचायतों के आरक्षण का हाल जानने को बेचैन हैं।
मेरिट के साथ ही नए निर्देशों से तय होना है आरक्षण
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में प्रधान पदों का आरक्षण नए निर्देशों से तय होना है। जो पंचायतें बीते पांच चुनावों में आरक्षित नहीं हो पाईं हैं, उन्हें पहली प्राथमिकता पर आरक्षित किया जाना है। इसके बाद के लिए मेरिट तो तय की गई है जिससे वर्ग वार पंचायतों को आरक्षित करने में कोई दिक्कत न हो।
चुनाव में 1612 क्षेत्र पंचायत सदस्यों, 15410 ग्राम पंचायत सदस्यों और 65 जिला पंचायतों के पदों के साथ ही प्रधान के 1214 पदों का आरक्षण होना है। प्रधान के 1214 पंचायतों को आरक्षित करने के लिए मेरिट तैयार की गई है। अनुसूचित वर्ग की महिलाओं के लिए 71 व अनुसूचित वर्ग के लिए 127 पद, अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए 112 व पुरुष व महिला दोनों के लिए 209 पदों का आरक्षण तय हो रहा है। इसके साथ ही महिलाओं के लिए 226 सीटों को आरक्षित किया जाना है। शेष 469 पंचायतें अनारक्षित होंगी।
200 पंचायतों में पांच चुनावों से सीटें रहीं सामान्य
पंचायतों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया 1995 के चुनाव से शुरू हुई। उस समय 1054 पंचायतें थीं। साल 2000, 2005, 2010, 2015 में पंचायतों के चुनाव हुए, लेकिन आरक्षण से 200 पंचायतें बचती रहीं। यहीं नहीं कई ब्लॉकों में आरक्षण भी पूरे नहीं किए गए और चुनाव कराए गए। अब प्रदेश सरकार ने सबसे पहले इन पंचायतों को मेरिट के आधार पर पिछड़ा वर्ग या अनूसचित जाति के लिए आरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की है। इन 200 पंचायतों में सामान्य वर्ग के लोगों का ही 25 सालों से कब्जा था। अब इसमें नए नियमों से बदलाव तय है।
पंचायतों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जो पंचायतें कभी आरक्षित नही हुईं हैं उन्हें पहले आरक्षित किया जाएगा। इसके बाद मेरिट से अन्य पंचायतों को आरक्षित किया जा रहा है। दो मार्च तक प्रक्रिया पूरी कर पहली सूची जारी की जाएगी। - सभाजीत पांडे, डीपीआरओ
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पंचायत चुनाव की स्थिति पर एक नजर
1214 जिले में कुल ग्राम पंचायतें
10 ग्राम पंचायतों में नहीं होंगे प्रधान व सदस्य के चुनाव
1204 ग्राम पंचायतों में होंगे सभी पदों के लिए चुनाव
1612 सदस्य क्षेत्र पंचायत के वार्ड
15410 सदस्य ग्राम पंचायत के वार्ड
65 सदस्य जिला पंचायत वार्ड
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