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मनवर की तर्ज पर अब टेढ़ी नदी के उद्घार की चलेगी मुहिम

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गोंडा। जिले की नदियों को संवारने की मुहिम अब और तेज होगी। पौराणिक मनवर नदी की तर्ज पर ही अब मनरेगा से टेढ़ी के जीर्णोद्घार का अभियान शुरू होगा। मनरेगा के साथ ही सिंचाई विभाग के सरयू ड्रेनेज खंड भी नदी की सिल्ट सफाई का कार्य करेगा। इसके लिए सरयू ड्रेनेज खंड ने पहने करीब छह करोड़ की योजना बनाई थी। इसे भी इसमें शामिल किया जाएगा।
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इसके अलावा जिन पंचायतों से होकर टेढ़ी नदी गुजर रही है, वहां की पंचायतें मनरेगा से कार्य कराएंगे। इससे श्रमिकों को रोजगार भी हासिल हो सकेगा। सीडीओ शशांक त्रिपाठी ने इसके लिए ब्लॉकवार पंचायतों के सचिवों और प्रधानों से संवाद कायम करना शुरू कर दिया है।
मनवर नदी के जीर्णोद्वार अभियान की सफलता के बाद अन्य नदियों के लिए अभियान चलेगा। टेढ़ी नदी के लिए करीब छह करोड़ की कार्य योजना सरयू ड्रेनेज खंड ने तैयार की है। टेढ़ी नदी के विकास के लिए ग्राम्य विकास विभाग ने सरयू ड्रेनेज खंड को प्रोजेक्ट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। करीब 135 पंचायतों से होकर गुजरने वाली टेढ़ी नदी के विकास का कार्य पंचायतें ही कराएंगी।
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जरूरत पड़ने पर क्षेत्र पंचायतों को भी शामिल किया जाएगा। पूरे प्रोजेक्ट में गांव के मनरेगा मजदूरों को रोजगार भी देना है, इससे प्रोजेक्ट में अधिक कार्य श्रम से संबंधित ही खर्च होगा। करीब दो करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा। इसके अलावा पौधरोपण पर भी खर्च होगा। नदियों के दोनों तरफ आवागमन के लिए पटरी बनेगी। इससे गांवों को भी एक दूसरे से जोड़ा जाएगा।
तीन तहसील क्षेत्रों में निकली है टेढ़ी
बहराइच से निकली टेढ़ी नदी जिले में कटरा बाजार के कटुआनाला गांव में प्रवेश करती है। यह बहराइच के भग्गड़वा से पुन: वापस होते हुए कटरा बाजार ब्लाक क्षेत्र, सदर तहसील क्षेत्र के कटहा घाट होते हुए तरबगंज तहसील क्षेत्र से प्रवाहित हो रही है। टेढ़ी नदी नवाबगंज से होते हुए चौखड़िया घाट से अयोध्या में जाकर सरयू में मिलती है। यह नदी जिले की जीवनदायिनी है परंतु अधिकांश जगहों पर छिछली होने के कारण इसमें सिल्ट का जमाव हो गया है। इससे नदी गर्मियों में कई जगहों पर सूख जाती है। यह नदी करीब 135 ग्राम पंचायतों से होकर गुजरती है।
नदियां होंगी गहरी और नदी की होगी सफाई
नदी की सफाई के साथ ही नदी में जहां सिल्ट है वहां सफाई होगी और आवश्यकता पड़ने पर खोदाई भी होगी। यह सारा कार्य मनरेगा से किया जाएगा। इससे नदी का उद्घार भी होगा और श्रमिकों को कार्य के साथ धनराशि भी मिलेगी।
नदियों के किनारे पोधों से फैलाएंगे हरियाली
नदियों की पटरियों को सुरक्षित करने के लिए दोनों तरफ पौधे रोपे जाएंगे। इससे हरियाली तो आएगी ही नदियों में कटान नहीं होगी। बरसात में नदियों में कटान होने से खेतों की मिट्टी नदी में समाहित हो जाती है। इसी मिट्टी को निकाल कर नदी के किनारे पटरी बनाई जाएगी और पौधरोपण कराया जाएगा। इसमें वन विभाग की मदद ली जाएगी।
अस्तित्व खोती जा रही है टेढ़ी नदी
टेढ़ी नदी बहराइच से निकल कर गोंडा के बहुत बड़े भूभाग को आच्छादित करती है। सिंचित क्षेत्रों में मक्का एवं धान के अतिरिक्त गन्ने की खेती बहुतायत में होती है। जीवनदायनी टेढ़ी नदी जो कभी अपने वेग में प्रवाहित होकर अपने गर्भ से पथरी, नउखन, सोती जैसी बड़ी झीलों एवं चौबेपुर, चमदई और बगुलहि जैसे-बड़े नालों को जन्म देकर पशु, पक्षियों एवं इंसानों की प्यास बुझाकर खेतों को हरियाली देकर अपनी उपस्थिति का एहसास कराती रही है। जीवनदायनी टेढ़ी नदी जीर्णोद्वार न होने से विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी है। नदी जगह-जगह सूख चुकी है। कहीं-कहीं नदी का स्वरूप तो दिखता है, लेकिन वहां पानी न होकर कीचड़ और सिल्ट भरा हुआ है। जहां थोड़ा बहुत पानी है भी तो वह सदाबहार जंगली घासों और जलकुंभी से पट चुका है। जीवनदायनी टेढ़ी नदी अपना अस्तित्व तेजी से खोती जा रही है
13.17 करोड़ रुपये से बनी थी योजना
जीवनदायिनी टेढ़ी नदी के पुनर्जीवन देने के लिए कार्ययोजना तैयार हुई थी। 269 किलोमीटर के दायरे में बहने वाली नदी को पुराने अस्तित्व में लौटाने के लिए 13.17 करोड़ रुपये मनरेगा योजना से खर्च करने की योजना बनी थी। सिल्ट सफाई के साथ ही नदी के किनारे पड़ने वाले तालाबों का भी जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
इन ब्लॉकों के गांवों से होकर गुजरती है नदी
टेढ़ी नदी जिले की कर्नलगंज व तरबगंज तहसील में बह रही है। विकासखंड कटराबाजार में 72 किलोमीटर, हलधरमऊ 13, परसपुर 10, बेलसर 28, झंझरी 27, तरबगंज 35 व नवाबगंज में 34 किलोमीटर लंबाई है। ये नदी का उद्गम स्थल बहराइच जिले में है। नदी में सिल्ट सफाई से जहां जल का ठहराव अधिक होगा, वहीं बरसात के मौसम में जल उत्प्लावन का खतरा भी कम रहेगा।
टेढ़ी नदी जिले की काफी महत्वपूर्ण नदी है और इसके जीर्णोद्वार की योजना नए सिरे से तैयार कराई जा रही है। पंचायतों से बात किया गया है सभी की सहभागिता से नदी का विकास किया जाएगा। श्रमिकों को रोजगार भी मिलेगा।
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- शशांक त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी
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