गोंडा। जिले के 2628 परिषदीय स्कूलों के चार लाख बच्चों से अब पुरानी किताबें जमा कराई जाएंगी। नई किताबों का आवंटन न होने से शासन ने शिक्षकों को किताबों की व्यवस्था छात्रों से ही करने के निर्देश दिए हैं ताकि नये शिक्षा सत्र की शुरुआत पहली अप्रैल से हो सके। पुरानी किताबों से ही बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई जाएगा। इससे शिक्षकों के सामने एक और मुश्किल खड़ी हो गई। ज्यादातर छोटे बच्चों के पास किताबें सुरक्षित ही नहीं हैं। वहीं किताबों को जुटाने में समय भी लगेगा। माना जा रहा है कि कागजों में आदेश तो हो गया है लेकिन पुरानी किताबों को जुटाने में शिक्षकों के पसीने छूटने तय हैं।
परिषदीय स्कूलों में नये शिक्षा सत्र की शुरुआत अप्रैल के प्रथम सप्ताह से हो रही है लेकिन व्यवस्था नहीं सुधर सकी है। जिले में चार लाख बच्चों की पढ़ाई के लिए विभिन्न विषयों की 25 लाख के करीब किताबों की जरूरत है। अभी तक शासन स्तर से किताबों के आवंटन की कोई सूचना ही नहीं है। विभाग ने अब पुराने छात्रों से ही किताबों को जमा कराकर नई कक्षाओं में जाने वाले छात्रों को उपलब्ध कराने को कहा है जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो सके।
बेसिक शिक्षा विभाग ने अपनी पुरानी व्यवस्था में जरा भी सुधार नहीं किया। इसके चलते बच्चों को नये शिक्षा सत्र में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई करनी होगी। यह भी संभव है कि बच्चों को किताबों के बिना ही कई माह बिताना पड़े। नया शिक्षा सत्र शुरू होने में 20 दिन बचे हैं लेकिन विद्यार्थियों को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित कराने की तैयारी अभी तक शुरू नहीं की गई है। ऐसे में विद्यार्थियों को अप्रैल में पाठ्य पुस्तकों का वितरण संभव नहीं लग रहा है।
परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को शासन की ओर से निशुल्क पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जाता है। पहली कक्षा में ही एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाना है। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भी पाठ्यक्रम का निर्धारण होना है लेकिन शासन स्तर से पाठ्यपुस्तकों के प्रकाशन को लेकर अभी तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। इसे पूरा करने में करीब एक महीने से अधिक का समय लगेगा।
जिस भी फर्म को टेंडर मिलेगा, उसे पुस्तक प्रकाशित कर वितरण के लिए दो महीने का समय देना होगा। ऐसे में मई-जून तक ही स्कूलों में किताबें पहुंच सकेंगी। माना जा रहा है कि टेंडर प्रक्रिया में देरी हुई तो किताबें जुलाई से पहले नहीं आ सकेंगी जबकि नया सत्र में 20 मई तक पढ़ाकर ही गर्मी की छुट्टियां होंगी। ऐसे में डेढ़ महीने तो बिना नई किताब के ही बच्चों को पढ़ना पड़ेगा।
बीत रहे शैक्षिक सत्र में 41 हजार विद्यार्थियों को यूनिफार्म, जूता-मोजा, स्कूल बैग और स्वेटर की राशि अब तक नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि ये विद्यार्थी अभिभावकों के बैंक खाते आधार से लिंक न होने के कारण अनुदान से वंचित हैं। इससे नये शिक्षा सत्र में इनको अनुदान मिलेगा या नहीं, इस पर सवाल है। वहीं पूर्व में जिन तीन लाख 69 हजार छात्रों के अभिभावकों को अनुदान मिला है, उनसे सामग्री का क्रय कराना भी चुनौती बना हुआ है। शिक्षकों को अभिभावकों से संपर्क करके सामग्री खरीदवानी है।
नये शिक्षा सत्र में स्कूलों के संचालन की तैयारियां पूरी करने के निर्देश बीएसए को दिए गये हैं। किताबों के लिए जो छात्र अगली कक्षा में जा रहे हैं, उनसे पूर्व की किताबें जमा करानी है। इसी तरह सभी को पुस्तकों की व्यवस्था अभी करनी है।
-विनय मोहन-वन, सहायक शिक्षा निदेशक, देवीपाटन मंडल