गोंडा। सरकारी अस्पतालों में इलाज को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के तमाम दावे कागजी साबित हो रहे हैं। जिम्मेदारों की शिथिलता से तमाम प्रयासों के बाद भी जिले में स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। कहीं डॉक्टर नदारत रहते हैं तो कई स्वास्थ्य केंद्र फार्मासिस्टों के भरोसे चल संचालित हो रहे हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं की यह तस्वीर अमर उजाला की पड़ताल में खुलकर सामने आयी। कुछ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व आयुर्वेद अस्पतालों तो सप्ताह में सिर्फ एक या दो बार ही डॉक्टर खानापूर्ति को आते हैं, बाकी समय में अस्पताल में मरीजों का इलाज फार्मासिस्ट व वार्ड के सहारे रहता है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय वैनिया में डॉक्टर लोकेश कुमार की तैनाती बतायी गयी। मौके पर डाक्टर अस्पताल से नदारत मिले। पूछने पर फार्मासिस्ट नवनिहाल ने बताया कि डॉक्टर की तीन दिन ड्यूटी बेलवाभान में रहती है।
अस्पताल में जगह जगह फैली गंदगी के बीच मरीज इलाज कराने को मजबूर दिखे। अस्पताल में मौजूद मरीज रमाकांत, अभिराम व वीर सिंह ने बताया कि बड़े डाक्टर साहबा तो सप्ताह में एक दो दिन ही कुछ समय के लिए आते हैं बाकी दवा देने व इलाज का कार्य फार्मासिस्ट व वार्ड ब्वाय ही करते हैं।
इस संबंध में क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी डॉ अशोक कुमार ने बताया कि सभी डॉक्टरों को नियमित समय पर अस्पताल में उपस्थित न मिलने वाले डाक्टरों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
पड़री कृपाल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुंडेरवा माफी में सुबह 11.30 बजे पहुंचने पर तैनात डॉक्टर की कुर्सी खाली मिली। अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट भी अवकाश पर बताया गया। इलाज कराने को मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी में तैनात डॉक्टर नेहा वर्मा कभी कभी अस्पताल आती हैं। एनएमए आरपी मिश्र और एएनएम मालती देवी व दुर्गेश्वरी भी ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिली।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात डॉक्टर भी दोपहर 12.30 बजे अस्पताल पहुंचने पर मौके पर नही मिली। पूछने पर अस्पताल कर्मी तथा ग्रामीण हनुमान प्रसाद, राकेश कुमार, विनोद व विनय ने बताया कि डॉक्टर मैडम हफ्ते में दो दिन सोमवार व गुरुवार को ही अस्पताल आती हैं। अस्पताल का काम काज तैनात फार्मासिस्ट सुनील कुमार, वार्ड बॉय संजय ही संभालते हैं।