गोंडा। हुनरमंद कारीगरों के लिए स्वरोजगार की राह अब आसान होगी। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का विस्तार कर विश्वकर्मा योजना 2.0 लागू की गई है। इसमें पांच पारंपरिक और नौ आधुनिक ट्रेड शामिल किए गए हैं। अब कुल 25 ट्रेड से जुड़े कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और स्वरोजगार के लिए ऋण की सुविधा मिलेगी। इकाई शुरू करने या कारोबार बढ़ाने के लिए कारीगरों को 10 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकेगा।
उद्योग उपायुक्त बाबूराम के अनुसार योजना के तहत चयनित कारीगरों को 10 दिन का निशुल्क कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण अवधि में 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से कुल पांच हजार रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद 15 हजार रुपये तक की टूलकिट मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी। इससे कारीगरों को आधुनिक उपकरणों के साथ अपना काम करने में मदद मिलेगी।
योजना में ऋण सुविधा का दायरा भी बढ़ाया गया है। कारीगर नई इकाई शुरू करने, कारोबार का विस्तार करने, तकनीकी उन्नयन, गुणवत्ता सुधार और पैकेजिंग के लिए 10 लाख रुपये तक ऋण ले सकेंगे। ऋण के लिए किसी गारंटी की जरूरत नहीं होगी और ब्याज नहीं लिया जाएगा। इसमें 15 प्रतिशत मार्जिन मनी सब्सिडी का भी प्रावधान है।
आवेदन से लेकर ऋण वितरण तक की समयसीमा भी तय की गई है। विभाग आवेदन पर तीन कार्यदिवस में निर्णय लेकर बैंक को भेजेगा। बैंक को 15 दिन में ऋण स्वीकृत या अस्वीकृत करने की जानकारी देनी होगी। ऋण स्वीकृत होने के बाद अधिकतम 15 दिन में धनराशि वितरित करनी होगी। लाभार्थी को छह माह की ऋण स्थगन अवधि भी मिलेगी। (संवाद)
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14 नए ट्रेड से बढ़ा योजना का दायरा
योजना में पहले बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी ट्रेड शामिल थे। अब पांच पारंपरिक और नौ आधुनिक ट्रेड जोड़े गए हैंं। इसमें पारंपरिक में मूर्तिकार, मालाकार, दूधवाला, भरभूजा और मछुआरा शामिल हैं। आधुनिक ट्रेडों में मोबाइल मरम्मत, ऑटोमोबाइल, विद्युत उपकरण व कंप्यूटर मरम्मत, प्लंबर, सोलर इलेक्ट्रिशियन, डिजिटल फोटोग्राफी, इलेक्ट्राॅनिक्स मरम्मत तथा सौंदर्य एवं वेलनेस को शामिल किया गया है।