गोंडा। अंग्रेजों के जमाने की भारी भरकम थ्री-नाॅट-थ्री (.303) राइफल अब गोंडा मंडल कारागार के कर्मचारियों के हाथों से विदा होने वाली है। बंदीरक्षकों के पास अब अत्याधुनिक इंसास राइफल नजर आएगी। शासन से मंडल कारागार को फिलहाल दो इंसास राइफलें उपलब्ध करा दी हैं। चरणबद्ध तरीके से पुराने हथियारों को इंसास से बदलने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वर्तमान में गोंडा मंडल कारागार में 900 से अधिक बंदी निरुद्ध हैं। इनमें कई कुख्यात बदमाश और सजायाफ्ता कैदी भी शामिल हैं। साथ ही विचाराधीन बंदियों में अधिकतर गंभीर आपराधिक घटनाओं के आरोपी हैं। मंडल मुख्यालय होने के चलते आसपास के जिलों के बंदी भी यहां स्थानांतरित होकर आते हैं।
भारत नेपाल सीमा का मंडल मुख्यालय होने के कारण यह मंडल कारागार हमेशा संवेदनशील माना जाता है। यहां के बंदीरक्षक अभी तक सुरक्षा का जिम्मा लाठी-डंडे और भारी थ्री-नाॅट-थ्री राइफल के सहारे संभाल रहे हैं, लेकिन अब आधुनिक हथियार मिलने से सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर हो जाएगी।
गृह विभाग ने सुरक्षा के मद्देनजर थ्री-नाट-थ्री राइफल से छुटकारा दिलाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। विभाग ने बंदीरक्षकों को इंसास राइफलें उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं। इससे कारागार की सुरक्षा व्यवस्था पहले से और सुदृढ़ हो जाएगी। शासन के निर्देश पर पहले चरण में गोंडा को दो इंसास राइफलें प्राप्त हुई हैं। धीरे-धीरे सभी पुराने हथियारों को हटाकर इंसास से लैस किया जाएगा।
इंसास राइफल हल्की, तेज और ज्यादा प्रभावी मानी जाती है। ये राइफल मिलने से सुरक्षाकर्मियों को न केवल राहत मिलेगी, बल्कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने की क्षमता भी बढ़ जाएगी।
अंग्रेजों के जमाने की थ्री-नाॅट-थ्री राइफल होगी इतिहास
जेलर आफताब अंसारी ने बताया कि शासन के इस निर्णय से अब गोंडा जेल में सुरक्षा की तस्वीर बदलती नजर आएगी। बंदीरक्षकों के हाथों में आधुनिक इंसास राइफलें एक तरफ जहां सुरक्षा का भरोसा बढ़ाएंगी, वहीं अंग्रेजी हुकूमत की याद दिलाने वाली थ्री-नाॅट-थ्री अब इतिहास बनकर रह जाएगी।