बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों को बंद कराने के सरकार के ऐलान के बाद स्कूल संचालकों ने नया फंडा खोज निकाला है। विद्यालय का संचालन जारी रखने के लिए अब वह कोचिंग का रजिस्ट्रेशन करा रहे है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कोचिंग रजिस्ट्रेशन की बाढ़ आ गई है और पिछले एक सप्ताह में करीब 150 आवेदन कोचिंग रजिस्ट्रेशन के लिए आ गए हैें।
प्रदेश सरकार ने बिना मान्यता के संचालित हो रहे स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने बगैर मान्यता के विद्यालय का संचालन करने पर एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त अगर स्कूल का संचालन जारी रहता है तो 10 हजार रुपया प्रतिदिन जुर्माना किया जाना है।
16 अगस्त से इन स्कूलों के खिलाफ अभियान की शुरुवात की जानी है। इसके अलावा सरकार ने अगले पांच साल तक किसी भी स्कूल को मान्यता न देने का एलान किया है। सरकार के इस रुख के बाद जिले के करीब 400 स्कूलों पर बंदी का खतरा मंडराने लगा है।
इस खतरे से बचने के लिए स्कूल संचालकों ने नया तरीका खोज निकाला है। विद्यालय को कार्रवाई की जद से बचाने व संचालन जारी रखने के लिए स्कूल संचालक अब कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कराने लगे हैं। पिछले एक सप्ताह में ही जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कोचिंग रजिस्ट्रेशन के लिए करीब 150 आवेदन आ चुके हैं। कार्यालय के लिपिक विष्णु श्रीवास्तव के मुताबिक रोजाना करीब 10 आवेदन कोचिंग रजिस्ट्रेशन के लिए आ रहे हैं।
बेसिक शिक्षा या माध्यमिक शिक्षा विभाग से मान्यता लेने के लिए आवेदक को कई प्रक्रिया को पूरा करना होता है जो बड़ी टेढ़ी खीर है लेकिन कोचिंग का रजिस्ट्रेशन इससे बेहद आसान है। कोचिंग संचालन के लिए सिर्फ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से उसका पंजीकरण कराना होता है।
इसके लिए अलग अलग शुल्क निर्धारित है। 10 छात्र पर 250 रुपये, 20 छात्र पर एक हजार, 40 छात्र पर 4 हजार, 50 छात्र पर 5 हजार, सौ छात्र पर 10 हजार व 200 छात्र संख्या पर 20 हजार रुपये के पंजीकरण शुल्क अदा करने पर तीन वर्ष की कोचिंग संचालन की अनुमति मिलती है। इसके अलावा दो से अधिक छात्र संख्या होने पर 25 हजार रुपये की धनराशि जमा करनी होती है। इस धनराशि की अदायगी के बाद तीन साल के कोचिंग चलाने की अनुमति मिल जाती है।
गोंडा। शहर से लेकर दूर दराज के कस्बों के गली मोहल्लों में करीब आठ सौ कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे हैं। इनमें सिर्फ 60 कोंचिंग सेंटर मान्यता प्राप्त है बाकी के सेंटर बिना मान्यता के किराये के कमरों में संचालित हो रहे है। इन सेंटरों पर छात्र छात्राओं के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। बावजूद इसके अफसरों की निगाह इन पर नहीं पड़ रही है।