गोंडा। बेसिक शिक्षा के स्कूलों में टाट- पट्टी पर छात्रों को बैठकर पढ़ाई करने से अब मुक्ति मिल सकती है। विभाग ने दो साल में सभी प्राइमरी स्कूलों को डेस्क बेंच देने की योजना तैयार की है। जिले के 1709 प्राइमरी स्कूलों में डेस्क बेंच की सुविधा नहीं है। कुछ स्कूलों के शिक्षकों ने अपने प्रयास से डेस्क बेंच का इंतजाम किया है, जिसमें स्थानीय लोगों के सहयोग से सुविधा मिली है। विभाग की ओर से सिर्फ जूनियर हाईस्कूलों को ही डेस्क बेंच की सुविधा मिली है। इस वित्तीय वर्ष से प्राइमरी स्कूलों को भी डेस्क बेंच देने की योजना शामिल किया गया है। जिससे पढ़ाई की व्यवस्था में परिवर्तन होगा।
बेसिक शिक्षा में सरकारी जूनियर स्कूलों में फर्नीचर देने की योजना 2017-18 से चल रही है, इसमें भी सौ के करीब स्कूलों को योजना का लाभ मिल सका है। इन स्कूलों में को फर्नीचर दिए जाने की योजना तो चल रही है। अगले दो सालों में सभी सरकारी प्राइमरी स्कूलों के बच्चे के लिए भी डेस्क व बेंच देने की योजना तैयार हुई है। सरकारी प्राइमरी स्कूलों में फर्नीचर देने की तैयारी है। जिले के 1709 प्राइमरी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब ढाई लाख बच्चे आज भी टाट- पट्टी या फिर चटाई पर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ऑपरेशन कायाकल्प से स्कूलों की सूरत तो बदली है, लेकिन डेस्क बेंच न होने से बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। शासन प्राइमरी स्कूलों को और बेहतर बनाने पर जोर दे रही है। जिले में इस बार नए नामांकन भी बड़े पैमाने पर होने हैं। जिसमें 83 हजार के करीब नए छात्रों का नामांकन हो रहा है। जूनियर हाईस्कूल और प्राइमरी स्कूलों को मिलाकर इस बार चार लाख 60 हजार से अधिक छात्र हो जाएंगे। छात्रों को बेहतर सुविधा देने के लिए डेस्क बेंच की जरूरत बढ़ गई है। जिससे नामांकन कराने वाले छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके।
जन सहयोग से कई प्राइमरी स्कूलों को मिला है डेस्क बेंच
जिले में शिक्षकों के प्रयास से कई स्कूलों में डेस्क बेंच की सुविधा है। इसमें स्थानीय लोगों का सहयोग रहा है। करनैलगंज के प्राइमरी स्कूल धौरहरा के साथ ही रूपईडीह के प्राइमरी स्कूल मौहारी में डेस्क बेंच की सुविधा शिक्षकों के प्रयास से लोगों के सहयोग से है। इसी दुर्जनपुर बेलसर के एक प्राइमरी स्कूल को वहां के प्रधान की ओर से दी गई है। कई स्कूल ऐसे हैं जहां पर स्थानीय लोगों के सहयोग या फिर बैंकों की ओर से डेस्क बेंच दी गई है। नवाबगंज में भी कुछ स्कूल हैं, जहां पर लोगों ने सहयोग किया है। सरकारी योजना में प्राइमरी स्कूल के शामिल न होने से सभी स्कूलों को डेस्क बेंच की सुविधा नही मिल सकी है। अब उम्मीद जगी है, जिससे शिक्षकों में भी उत्साह है।
एक ही परिसर में दोनों स्कूल और दोहरी व्यवस्था
जिले में छह सौ के करीब स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही परिसर में प्राइमरी व जूनियर हाईस्कूल संचालित हैं। जिसमें जूनियर हाईस्कूल के बच्चे डेस्क और बेंच पर बैठते हैं, वहीं प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को जमीन पर टाट- पट्टी पर बैठना पड़ता है। इससे बच्चों के लिए एक ही स्कूल में दोहरी व्यवस्था रहती है। जिसके चलते बच्चों के मन पर भी असर पड़ता है। विभाग ने बच्चों के मनोभाव को देखते हुए प्राइमरी स्कूलों के लिए योजना बनाने की तैयारी की है।
प्राइमरी स्कूलों को डेस्क बेंच की सुविधा मिलनी चाहिए। जिससे बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में कठिनाई न हो। जमीन पर बैठकर बच्चे इस आधुनिक युग में भी पढ़ते हैं, इससे अच्छा संदेश नहीं जाता है।
वीरेंद्र मिश्र, प्रदेश प्रवक्ता राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ
शासन से डेस्क बेंच की सुविधा स्कूलों को दिए जाने के बजट मिलने पर व्यवस्था कराई जाएगी। शासन बेसिक शिक्षा को संसाधनों से लैस करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी