गोंडा। 11 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस सरयू परियोजना का लोकार्पण करेंगे वह गोंडा में अभी तक पूरी नहीं हो पायी है। सिंचाई विभाग के अफसरों की लापरवाही से जिले में इस परियोजना के तहत पूरा होने वाला कई नहरों का गैप कार्य अधूरा ही पड़ा है। परियोजना को लंबा खींच कर जेब भरने में माहिर सिंचाई विभाग के कारण नहरों के गैप पूरे न हो पाने से सभी रजबहों तक पानी नहीं पहुंच पाएगा।
सरयू नहर खंड प्रथम परसा गोडरी से धनई पट्टी रजबहवा तक जाने वाली नहर परियोजना की खोदाई का काम वर्ष 2003 में शुरू हुआ। 22 किलोमीटर लंबी नहर का बजट वर्ष 2003 में तो 78 करोड़ था। नहर की लागत बढ़ी और परसागोड़री-धनईपट्टी नहर का गैप पूरा नहीं हो पाया।
हालांकि विभाग ने वर्ष 2005 में ही नहर को कागज में पूर्ण करके 55 लाख का फर्जी भुगतान भी ले लिया था। वर्ष 2012 में शासन ने पूरे प्रकरण को संज्ञान में लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की।
वर्ष 2017 में सिंचाई विभाग के तत्कालीन अधिशासी अभियंता सहित चार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके तीन गुना रिकवरी का आदेश हो गया। परसा गोड़री व धानी धनखर, सालपुर के किसानों को बिना नोटिस दिए ही विभाग ने नियम ताक पर रख कर उनकी जमीनों का अधिग्रहण भी कर लिया।
इस मसले पर वर्ष 2018-19 में शुरू हुआ किसानों का धरना करीब 10 माह तक चला। 10 माह बाद उपजिलाधिकारी करनैलगंज के अश्वासन पर किसानों ने धरना समाप्त किया। वर्ष 2019-20 में जब विभाग बिना मुआवजा दिए जबरदस्ती नहर खोदने की तैयारी करने लगा तो परसा गोडरी के किसान पुन: धरना पर बैठ गये। 13 माह से किसानों का धरना अभी भी चल रहा है।
सरयू नहर से निकलने वाली 9 माइनर 55 किलोमीटर बन कर तैयार है। जिन दस हजार किसानों ने अपनी जमीन दी थी वह बीते 18 साल से सिंचाई के लिए नहर में पानी आने के इंतजार में हैं। विभागीय लापरवाही से लोकार्पण के बाद भी जिले में परियोजना का कार्य अधूरा ही रहेगा।
22 किलोमीटर मुख्य नहर व इससे निकलने वाले 55 किलोमीटर के माइनर बनकर तैयार हैं। केवल परसा गोडरी में 6 सौ मीटर व धानी धनखर, सालपुर में पौने दो किलो मीटर का विवाद है। जहाँ दोनों स्थान पर किसान खेत में पंडाल लगाकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
किसान बेनीमाधव सिंह, कमलेश कुमार शुक्ल, राजेन्द्र सिंह, वीरेंद्र यादव, व्रजेश कुमार आदि ने बताया कि हम लोग नहर खोदने का विरोध नहीं कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि नए सर्किल रेट पर विभाग को मुआवजा देना चाहिए, क्योंकि धोखा विभाग ने किया। धनई पट्टी नहर में रामापुरवा के पास भी गैप है। यह भी पूरा नहीं किया गया। इटियाथोक क्षेत्र में कंचनपुर माइनर में जमुनहीं हरदोपट्टी गाँव के पास अभी भी गैप बना हुआ है। इसके अलावा अधिकांश जगहों पर पुलों का निर्माण कराया जाना बाकी है।