इटियाथोक। सऊदी अरब में काम कर रहे करुवापारा निवासी गोरेलाल का वीजा खत्म होने और उन्हें जेल भेजने का डर दिखाकर उनके गांव के ही राजेश कुमार ओझा से 1.69 लाख रुपये की साइबर ठगी कर ली गई। जालसाज ने गोरेलाल के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर मैसेंजर के जरिये हिंदू युवा वाहिनी के पूर्व जिला मंत्री राजेश कुमार ओझा से संपर्क किया और मदद के नाम पर रुपये मांगे। विदेश में फंसे गांव के साथी की मदद के प्रयास में राजेश साइबर ठगी का शिकार हो गए। मामले में इटियाथोक थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
करुवापारा निवासी राजेश कुमार ओझा के मुताबिक, उनके गांव के गोरेलाल सऊदी अरब में काम करते हैं। किसी जालसाज ने गोरेलाल के नाम और फोटो का इस्तेमाल कर मैसेंजर पर उन्हें संदेश भेजा। संदेश में वीजा का नवीनीकरण नहीं होने और जल्द ही वीजा की अवधि समाप्त होने की बात कही गई। साथ ही वीजा खत्म होने पर जेल भेजने का डर दिखाकर मदद मांगी गई। ठग ने रुपये मंगाने के लिए पंजाब नेशनल बैंक के एक खाते का नंबर भी भेजा।
गांव के युवक को परेशानी में समझकर राजेश ने 29 सितंबर 2026 को आरटीजीएस से एक लाख रुपये भेज दिए। इसके बाद बारकोड के जरिये 40 हजार और 29 हजार रुपये दिए। इस तरह जालसाज ने कुल 1.69 लाख रुपये ऐंठ लिए। इसके बाद भी उसने वीजा के नाम पर 1.29 लाख रुपये और मांगे। लगातार रुपये मांगने पर राजेश को ठगी का संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
एएसपी (पूर्वी) अजीत कुमार ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना की जा रही है। साइबर सेल की टीम भी मामले की जांच में जुटी है।
ऐसे बचें साइबर ठगी से
साइबर विशेषज्ञ हरिओम टंडन के मुताबिक, विदेश में फंसे किसी परिचित के नाम से मदद मांगने का संदेश मिलने पर बिना पुष्टि किए रुपये नहीं भेजने चाहिए। संबंधित व्यक्ति के पुराने मोबाइल नंबर पर सीधे कॉल करके या उसके परिवार के किसी सदस्य से संपर्क कर उसकी पहचान और स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि वीजा, जेल या किसी आपात स्थिति का डर दिखाकर जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया जाए तो विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। किसी बैंक खाते में रुपये भेजने या बारकोड के जरिये भुगतान करने से पहले लाभार्थी की पहचान की जांच जरूर करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत अपने बैंक को इसकी सूचना देनी चाहिए। साथ ही साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करके या आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।