गोंडा। पेट्रोलियम कंपनियों ने डीजल आपूर्ति के कामर्शियल रेट में बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे पेट्रोलियम कंपनी से रोडवेज ने डीजल आपूर्ति का करार तोड़ दिया है। अब रोडवेज की बसें पेट्रोल पंपों के सहारे दौड़ रही हैं। इससे रोडवेज को तो मुनाफा हो रहा है। मगर पेट्रोलियम कंपनी से करार टूटने से कंपनी को रोडवेज से होने वाले मुनाफे का नुकसान उठाना पड़ है।
परिवहन विभाग की कार्यशाला में पिछले तीन दशक से डीजल पंप बने हैं। जहां से रोडवेज की बसों को डीजल आपूर्ति की जा रही थी। इसके लिए परिवहन विभाग ने पेट्रोलियम कंपनी से डीजल की आपूर्ति का करार था। मगर 15 दिन पहले पेट्रोलियम कंपनी ने अचानक डीजल के कामर्शियल रेट 5 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए।
इससे पेट्रोल पंपों पर 88.31 रुपये प्रति लीटर की दर से मिलने वाला डीजल कामर्शियल दर से रोडवेज को 93.31 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था। इस वजह से रोडवेज ने पेट्रोलियम कंपनी से डीजल की आपूर्ति का करार तोड़ दिया। इससे अब रोडवेज को डीजल तो सस्ता मिल रहा है। मगर पेट्रोल पंप से तेल लेने के लिए जाने में बसों के संचालन में समय बर्बाद हो रहा है।
कुल बसें-88
रोडवेज बसें-75
अनुबंधित बसें-13
कुल चालक-167
नियमित चालक-33
संविदा चालक-134
कुल परिचालक-153
नियमित परिचालक-18
संविदा परिचालक-135
पेट्रोलियम कंपनियों ने डीजल के कामर्शियल रेट में बढ़ोत्तरी कर दी है। इससे पूरे प्रदेश में रोडवेज ने पेट्रोलियम कंपनियों से डीजल आपूर्ति का करार तोड़ दिया है। अब पेट्रोल पंपों से डीजल लेकर बसों का संचालन कराया जा रहा है। आरएम पांडेय, एआरएम रोडवेज