विश्नोहरपुर (गोंडा)। दो वर्ष पहले आई बाढ़ में गोंडा को अयोध्या से जोड़ने वाला ढेमवाघाट मार्ग तीन स्थानों पर कट गया। पानी भरने की वजह से लाखों लोगों का आवागमन बंद हो गया। बाढ़ के बाद भी सड़क का निर्माण कराने की तैयारी पर ग्रहण लगा हुआ है।आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों की टीम ने दो बार निरीक्षण किया। लोक निर्माण विभाग की ओर से 72 लाख रुपये दिए गए हैं। जिस पर आईआईटी के विशेषज्ञों ने अध्ययन शुरू किया है।
क्षेत्र के ढेमवा मार्ग का निर्माण न होने से लोगों की निराशा बढ़ने लगी है। दो वर्ष पहले बाढ़ में तीन स्थानों पर कटे इस मार्ग पर आवागमन बंद हो गया था। बाढ़ का पानी हटने के बाद दत्तनगर के बैसिया के निकट वैकल्पिक मार्ग से पुल तक कच्चे रास्ते से आवागमन चालू हो गया था, लेकिन पहले ही वर्ष भारी वाहनों के चलते यह रास्ता भी खराब हो गया। तब से लेकर अब तक इसी जर्जर रास्ते से ही आवागमन जारी है।
सांसद करण भूषण सिंह व विधायक प्रेमनरायन पांडेय ने जनता की मांग को प्रदेश सरकार के समक्ष रखा था। जिस पर आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों द्वारा इस सड़क के निर्माण को लेकर आने वाली बाधाओं का आकलन शुरू किया गया है।
लाइफ लाइन है ढेमवा मार्ग
नवाबगंज से अयोध्या-लखनऊ हाईवे को जोड़ने वाला यह मार्ग माझा वासियों के लिए लाइफलाइन कहा जाता है। बाढ़ के समय मार्ग पूरी तरह बंद होने से व्यापार, शिक्षा, कृषि पर विशेष प्रभाव पड़ता है। दत्तनगर, साकीपुर, गोकुला, ब्यौंदा, बनगांव, बहादुरपुर सहित दर्जनों गांवों के बच्चे पढ़ाई के लिए अयोध्या जाते हैं। माझा क्षेत्र से दूध व खोवा का व्यापार होता है। काम की तलाश में क्षेत्रीय मजदूर भी अयोध्या जाते हैं।