तरबगंज व नवाबगंज इलाके के 52 गांवों पर फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। टेढ़ी नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत है। ये गांव हर बार बाढ़ से प्रभावित होते हैं। ये 52 गांव टेढ़ी व घाघरा के मध्य स्थित हैं। लेकिन 25 गांव ऐसे हैं, जहां टेढ़ी नदी का पानी गांवों तक भर जाता है। सरकारी स्तर पर बाढ़ प्रभावित गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए तमाम वादे किये जाते हैं, मगर बाढ़ समाप्त होते ही सभी वादे फाइलोें में कैद होकर रह जाते हैं।
तरबगंज तहसील क्षेत्र में बह रही टेढ़ी नदी के किनारे बसे 52 गांवों की करीब 50 हजार आबादी व हजारों हेक्टेयर फसल बाढ़ से हर साल प्रभावित होती है। तहसील क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति हर साल जुलाई से शुरू हो जाती है।
अब एक बार फिर टेढ़ी नदी का जलस्तर बढ़ने से इन 52 गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन की फाइलों में बाढ़ प्रभावित गांवों में बाढ़ चौकी व मेडिकल टीमों को लगा दिया जाता है, पर यह सब कागजों में ही होता है। उधर, तहसील तरबगंज के एसडीएम जेपी सिंह ने बताया कि बरसात होने से टेढ़ी नदी का जलस्तर बढ़ा है। लेकिन अभी बाढ़ का खतरा नहीं है। बाढ़ से निपटने के लिए पूरी तैयारी है।
तहसील क्षेत्र में बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांवों में ब्यौदा माझा, तुलसीपुर माझा, जैतपुर, दुर्गागंज माझा व माझा राठ, ऐली परसौली, गढ़ी, जबरनगर, परासपट्टी पुरुवार, मझवार, रांगी, चिवरहा, बहादुरपुर, सोनौली मोहम्मदपुर, सरायनामू, बनगांव, दत्तनगर, गोकुला, साकीपुर, चौखड़िया, इंदरपुर, नकहरा, दुल्लापुर, इब्राहिमपुर, कटराभोगचंद, महेशपुर, जफरापुर, फतेपुर, देईपुर व वजीराबाद शामिल हैं।
वहीं, सिघौटी, मोढ़ी, कड़ौरा, पालिया चरौठा, गभोरा, ब्यौदा उपरहर, गोपसराय, महरमपुर घांचाबीकापुर, धनौली, चंदसुहा, सेमरासेखपुर, विश्वनोहरपुर, खरगूपुर, खेमपुर, पुरेअम्बर, महंगूपुर, तुरकौली, बालापुर, कनकपुर, इस्माइलपुर व लोलपुर गांव भी बाढ़ की चपेट में आते हैं।