तरबगंज गोंडा। रविवार को बनगांव के गोशाला में पकड़े गए मवेशियों को छोड़ने पहुंची पुलिस को ग्रामीणों के आक्रोश के चलते बैरंग वापस लौटना पड़ा। बरामद पशुओं को गौशाला में ठौर नहीं मिल सकी। गांव के लोगों का कहना था कि अधूरे गो आश्रय केंद्र पर पशु छोड़ना उचित नहीं है। अगर पशु छोड़ दिये गए तो खेतों को ही बर्बाद करेंगे। गांव वालों के विरोध के बाद देर शाम तक मवेशियों को अन्य गोशालाओं में शिफ्ट करने की कवायद होती रही।
तरबगंज विकासखंड में गोशाला कागजों में संचालित हो रही है। इसका जीता जागता उदाहरण रविवार को देखने को मिला। तरबगंज थाने की पुलिस ने बीती रात रामपुर टेंगरहा गांव से तस्करी के लिए ले जाए जा रहे पशुओं को ट्रक समेत पकड़ा। जिसमें दो दर्जन से अधिक मवेशी लदे हुए थे। ट्रक को कब्जे में लेकर तरबगंज थाने की पुलिस बनगांव गोशाला पहुंची।
यहां पर गौशाला में न तो स्टाफ मिला और न पशुओं को रखने की कोई व्यवस्था ही थी। छुट्टा पशुओं को लेकर पहुंचने की सूचना मिलते ही सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण बनगांव बंधे पर एकत्र हो गए और ट्रक को घेरकर पुलिस प्रशासन के विरुद्ध नारेबाजी करते रहे। कई ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी को भी फोन कर यहां की समस्या से अवगत कराया और कहा कि अधूरे गो आश्रय केंद्र पर पशुओं को छोड़ने से दिक्कत होगी।
स्थानीय स्तर जन आक्रोश को देखते हुए थानाध्यक्ष तरबगंज इंद्रजीत यादव ने मवेशियों को वहां से हटाकर अन्य गौशालाओं में भेजने का आश्वासन दिया। उसके बाद स्थानीय लोग माने। वहीं ट्रक में लदे होने के कारण मवेशियों की हालत काफी खराब हो गई है।
बनगांव में विरोध प्रदर्शन के दौरान हर्षवर्धन सिंह, हरे राम शुक्ला, नाथूराम, ओमप्रकाश मौर्य, दयाशंकर, राजेश कुमार, बेचू राम गौतम, राजेश, सचिन सिंह यादव, ताज मोहम्मद, संजय सिंह, राजेंद्र सिंह, सुशांत मिश्रा, अजीत सिंह, अजय प्रताप सिंह, महेश कुमार सैनी आदि शामिल रहे।
विकासखंड तरबगंज के बनगांव की गोशाला मेरे कार्यकाल के पूर्व स्वीकृत हुई थी। गोशाला अब तक संचालित नहीं हो पाई है, इसमें बजट भी नहीं है। लिहाजा मवेशियों को किसी अन्य गोशाला में शिफ्ट किया जाएगा।
- विवेक प्रिय, खंड विकास अधिकारी तरबगंज