गोंडा। विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह और उनके सहयोगियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने पुनरीक्षण वाद खारिज करने संबंधी एमपी/एमएलए विशेष न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए मामले का निस्तारण गुण-दोष के आधार पर करने का आदेश दिया है। साथ ही एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर पूर्व में दिया गया स्थगन अंतिम निर्णय तक यथावत रखने को कहा है।
मनकापुर के ग्राम भिटौरा निवासी अजय सिंह ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर कहा था कि उनकी पत्नी मनीषा सिंह के नाम बैनामाशुदा 16 डिसमिल भूमि का बैकडेट में तीन साल पुराने स्टांप पर फर्जी बैनामा करा दिया गया। वर्ष 2024 में मनकापुर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराने के बाद भी पुलिस ने राजनीतिक दबाव में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। वादी ने आरोप लगाया कि दबाव बनाकर जमीन हड़पने के उद्देश्य से सांसद प्रतिनिधि राजेश सिंह निवासी धुसवा ने उनके व पत्नी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। अजय सिंह ने राजेश सिंह सहित अन्य पर धमकी देकर भूमि हड़पने का प्रयास करने का आरोप लगाया।
11 अगस्त 2025 को विशेष न्यायालय एमपी/एमएलए (सिविल जज सीनियर डिवीजन) अपेक्षा सिंह ने मनकापुर कोतवाल को आरोपियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना का आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध कीर्तिवर्धन सिंह ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की। 26 सितंबर 2025 को प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आदेश के क्रियान्वयन पर अग्रिम तिथि तक रोक लगा दी थी।
एडीजे तृतीय/एमपीएमएलए विशेष न्यायालय में सुनवाई के दौरान निगरानीकर्ता की ओर से 11 बार स्थगन प्रार्थनापत्र दिए गए। 30 जनवरी को पुनः स्थगन मांगा गया, लेकिन विरोध के बाद अदालत ने अनुपस्थिति के आधार पर पुनरीक्षण वाद खारिज कर दिया।
इस आदेश के खिलाफ कीर्तिवर्धन सिंह ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के ताज मोहम्मद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि स्वीकृत पुनरीक्षण याचिका को केवल अनुपस्थिति के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।
शुक्रवार को न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए विशेष न्यायालय का आदेश निरस्त कर दिया और पुनरीक्षण वाद का निर्णय गुण-दोष के आधार पर करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निस्तारण तक पूर्व में दिया गया स्थगन आदेश प्रभावी रहेगा।