एल्गिन-चरसड़ी बांध का हिस्सा लगातार घाघरा में समाता जा रहा है तथा नदी की धारा सीधे करनैलगंज तहसील के गांवों की ओर मुड़ती जा रही है। दो दिनों में हुई कटान से कटे हुए बांध का करीब 200 मीटर से अधिक हिस्सा बह गया। वहीं घाघरा नदी का जलस्तर भले ही धीरे-धीरे घटने लगा हो, मगर बाढ़ से पीड़ितों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पानी से घिरे ग्रामीणों का एक बार फिर से पलायन शुरू हो गया है।
क्षेत्र के ग्राम नकाहरा, घरकुंइया, प्रतापपुर, काशीपुर, अतरसुइया, दिवली के करीब दो दर्जन मजरों को बाढ़ के पानी ने अपनी आगोश में ले लिया है। अब वह अपना दायरा बढ़ाता ही जा रहा है। वहीं दूसरे दिन भी बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल सकी है।
पूर्व में आए बाढ़ के पानी से अधिकतर फसलें नष्ट हो चुकी हैं। कुछ लोगों का आशियाना भी उजड़ चुका था। कि पुन: वही मुसीबत उनके सामने आकर खड़ी हो गई है। अपना सब कुछ गवां चुके ग्रामीणों के पास न तो अब खाने की व्यवस्था है और न ही पशुओं के लिए चारे का कोई जुगाड़ रह गया है। इसलिए वह अपना घर भी नहीं छोड़ पा रहे हैं। बांध का हिस्सा लगातार कट कर नदी में समाता जा रहा है। जिससे नदी का जलस्तर घटते समय भी क्षेत्र में पानी आ रहा है।
बांध के बचाव का भी कोई उपाय प्रशासन की ओर से नहीं हो पा रहा है। एसडीएम हरिशंकर शुक्ला ने बताया कि शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया। बाढ़ एवं घाघरा का पानी घटने लगा है।अधिकांश पानी खेतों एवं गड्ढों में भरा हुआ है। नावें भी नहीं चल पा रही हैं, फिर भी गांवों में नावें लगी हुई हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।